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अयोध्या: रामालय ट्रस्ट अयोध्या में बनवाएगा सोने का मंदिर, नक्शा भी तैयार

Sun, 01 Dec 2019 06:52 PM IST
लखनऊ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
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जानकी घाट में दर्शन करते स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद। - फोटो : FAIZABAD
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रामालय ट्रस्ट अयोध्या में सोने का मंदिर बनवाएगा। श्रीरामजन्मभूमि न्यास के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शनिवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने कहा कि फिलहाल राम मंदिर बनने में लंबा समय लगेगा। इसलिए रामालय ट्रस्ट सोने का मंदिर बनाएगा और उसकी मंशा है कि मकर संक्रांति के दिन रामलला को उस मंदिर में विराजित कर दिया जाए। मंदिर का नक्शा भी तैयार हो चुका है। उन्होंने रामलला का दर्शन करने के साथ ही संतों से मुलाकात कर यह मंशा बताई।

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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि चेन्नई में एक बड़े काष्ठ कलाकार से संपर्क किया गया है। वह सात पीढ़ियों से मंदिर बनाते हैं। एक नक्शा भी उन्होंने बना के दिया है। एक फोर डायमेंशनल (4-डी) मॉडल है। जैसे ही भगवान सूर्य उत्तरायण होंगे अर्थात मकर संक्रांति के दिन से भगवान को उस मंदिर में विराजमान कराने का हमारा प्रयास है। ऐसा मंदिर बनना चाहिए जैसा पहले कभी नहीं बना हो और कोशिश होनी चाहिए भविष्य में भी न बन सके। मंदिर में उत्तर-दक्षिण दोनों शैलियां शामिल होंगी, वास्तु विधान, शास्त्र विधि का विचार कर भव्य मंदिर बनाएंगे। 1008 फुट ऊंचा शिखर होना चाहिए। रसोई हाल ऐसा हो कि कम से कम एक लाख आठ हजार लोग एक साथ भोजन कर सकें। सात दिसंबर को मॉडल सार्वजनिक करने पुन: अयोध्या आएंगे।


विहिप के मॉडल में भव्यता-दिव्यता नहीं

रामालय ट्रस्ट के सचिव ने विहिप के राममंदिर मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि सबने कहा था कि प्लॉट मिल जाए तब नक्शा तैयार करें, प्लॉट मिलने के पहले ही नक्शा बनवा दिया। नक्शे का पत्थर खरीदकर मॉडल भी बनवा दिया गया। ये कहीं होता है क्या। उस पत्थर का समायोजन करेंगे। 130 फिट ऊंचा मॉडल आकाश नहीं छू रहा है। इस मॉडल में भव्यता और दिव्यता नहीं है। भावनाएं हैं कारसेवकों का योगदान है। रामभक्तों ने शिलाएं दी पैसा दिया है उसी से खरीदा गया है। इसका भी उसी परिसर में समायोजन किया जाएगा।

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अयोध्या को पर्यटन स्थल मत बनाइए

नया ट्रस्ट बनाने की बात फैसले में है ही नहीं। जो पुराने ट्रस्ट हैं उन्हीं में से किसी एक को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। कोर्ट ने कहीं नहीं कहा है कि सरकार नया ट्रस्ट बनाए। जब जगन्नाथपुरी का मुकदमा आया था तब कोर्ट ने कहा था कि धर्मनिरपेक्ष कार्यों में सरकारों का क्या काम है। यह बहुत बड़ी टिप्पणी थी उच्चतम न्यायालय की। 22 नवंबर को भारतीय जनता पार्टी बागपत के सांसद सत्यपाल ने लोकसभा में एक बिल रखा है। उस बिल में उन्होंने कहा है कि सरकार धर्मनिरपेक्ष है।

मंदिरों पर जो अधिग्रहण सरकार ने कर लिया है उसे वापस किया जाए। मंदिर धार्मिक लोगों के अधिकार में होना चाहिए। धर्मनिरपेक्ष सरकार मंदिर में क्या कर रही है। मस्जिद,गिरिजाघरों में क्या करेगी। हालांकि वहां नहीं गई है केवल मंदिरों में गई है। मंदिरों में उसका क्या काम है। धार्मिक स्थानों में धर्मनिरपेक्ष सरकार का हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अयोध्या को धर्मस्थान, उपासना स्थल ही रहने दीजिए, पयर्टन स्थल मत बनाइए।

ट्रस्ट के लिए ठोंका है दावा
रामालय न्यास के सचिव ने कहा कि अयोध्या एक्ट के आधार पर हमने भी ट्रस्ट में भागीदारी का दावा ठोका है। हमारा क्लेम सही है सरकार को पत्र भेजा दिया गया है। 1993 के अधिग्रहण कानून के अनुसार किसी ट्रस्ट को देना है। अब जो दूसरे ट्रस्ट हैं वह उस रूप में नहीं हैं। रामजन्मभूमि मंदिर निर्माण ट्रस्ट भी रामालय ट्रस्ट से जुड़ा है। हमने अपनी दावेदारी की है। धर्माचार्यों की चिंता यह है कि 500 वर्षों के संघर्ष के बाद मिला है तो यह धार्मिक स्थल से इतर स्थल न बन जाए।
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सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की समीक्षा की जरूरत

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट से जो निर्णय आया है वह समीक्षा का विषय है। रामजन्मभूमि की भूमि मिल गई है लोग मात्र इसी से प्रसन्न हैं। इसकी समीक्षा करने की जरूरत ही नहीं समझी, लेकिन कई ऐसे बिंदु हैं जिनकी समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने मुस्लिमों को पांच एकड़ जमीन दिए जाने पर भी सवाल उठाया।
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