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28 साल बाद रामलला सहित चारों भाईयों की कलाई पर सजेगी राखी

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अयोध्या। इस बार रक्षाबंधन का पर्व रामलला के दरबार में भी मनेगा। 28 साल बाद एक बार फिर से रामलला को राखी बांधने की परंपरा का निवर्हन होगा। रामजन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि इस परंपरा का निवर्हन बाबरी विध्वंस के पहले तक होता रहा। सात जनवरी 1993 को अयोध्या एक्ट लागू करते हुए रामजन्मभूमि का अधिग्रहण कर लिया गया तो यह परंपरा टूट गई।
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अब 28 साल बाद जब रामलला टेंट से आजाद होकर अस्थायी मंदिर में विराजमान हो गए हैं और हर पंरपरा व उत्सव का पालन हो रहा है। ऐसे में इस बार रामलला के कलाई में भी राखी सजेगी। आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि यह राखी 84 कोसी परिक्रमा की परिधि में अयोध्या व अंबेडकरनगर जनपद की सीमा के मध्य स्थित श्रृंगीश्रृषि आश्रम से रामलला की बहन शांता की ओर से प्रतीकात्मक रीति से भेजी जाएगी। बताया कि राम की बहन शांता का विवाह श्रृंगि ऋषि से हुआ था। गोसाईगंज क्षेत्र में श्रृंगि ऋषि का आश्रम है। यहां से प्रतिवर्ष रामलला के लिए राखी आती थी और चारों भाइयों को राखी बांधी जाती थी। अब 28 साल बाद फिर से इस परंपरा का पालन पुन: किया जाएगा। संवाद
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