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ऑक्सीजन सिलेंडर की क्वालिटी पर उठे सवाल

Mon, 21 Aug 2017 11:35 PM IST
अमर उजाला/फैजाबाद
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अस्पताल - फोटो : Amar Ujala
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 जिला अस्पताल में रविवार रात करीब साढ़े नौ बजे इमरजंसी में ऑक्सीजन गैस के सिलेंडर में हुए लीकेज ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना ऑपरेशन थियेटर या मरीजों से भरे वार्ड में होती तो लोगों की जान तक जा सकती थी। मामले में प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक आरपी राय ने सिलेंडर की क्वालिटी पर सवाल उठाया है। मौके पर कहा कि 7 वर्षों से सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम बेकार पड़ा है, जबकि खरीदे जा रहे सिलेंडर की क्वालिटी ठीक नहीं है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से दूसरे दिन भी कोई शिकायत नहीं दी गई है।
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ऑक्सीजन की कमी से गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में मौतों का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि यहां जिला अस्पताल की इमरजेंसी सेवा कक्ष में ऑक्सीजन सिलेंडर लीक होने से रविवार रात साढ़े नौ बजे भगदड़ मच गई।

सिलेंडर का रिसाव इतना अधिक था कि पास गए स्वीपर भानू (50) निवासी सुभाष नगर, नगर कोतवाली का हाथ चिल्ड गैस की चपेट में आने से सुन्न पड़ गया। उसे तत्काल भर्ती किया गया है। वैसे जिला अस्पताल में लाखों खर्च कर सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम बनाया गया। मगर बनने के बाद से ही वर्ष 2009 से यह बेकार पड़ा है। संबंधित ठेकेदार द्वारा पूरी लाइन स्थापित कराने के बाद महज एक वर्ष ही चल सकी।
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पिछले करीब सात वर्षों से यह सिस्टम शो-पीस बन कर रह गया है और मरीजों को सिलेंडरों से ही ऑक्सीजन मुहैया कराई जा रही है। कार्यदायी संस्था ने मनमानीपूर्ण ढंग से जिला अस्पताल के आईसीयू, इमरजेंसी सहित सभी वार्डों में ऑक्सीजन सेंट्रल लाइन स्थापित कराई और धन निर्गत करा लिया।

इसके निर्माण के लिए महज वर्ष के बाद ही यह सिस्टम फेल हो गया। यहां से ऑक्सीजन सप्लाई पूरी तरह बाधित हो गई। वर्ष 2010 से बंद पड़ा यह सिस्टम आज तक नहीं बन सका, तब से प्रदेश में तीसरी सरकार वजूद में आ चुकी है। महज एक वर्ष में आई खामियों को दूर करने की फिक्र न तो कार्यदायी संस्था को रही, न ही विभाग ने ही कोई प्रयास किया। अब स्वास्थ्य विभाग इसकी मरम्मत कर सुचारु संचालन के लिए बजट न होने का रोना रो रहा है।

एक वर्ष में ही फेल हुए इस सिस्टम की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं है। 
हाल यह है कि मौजूदा समय में सिलेंडरों से ही अनेक अव्यवस्थाओं के बीच मरीजों को ऑक्सीजन जैसे जीवनरक्षक उपकरण पर रखा जाता है जबकि सभी वार्डों में वैक्यूम व सेक्सन सिलेंडर सहित सेंट्रल ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम के सारे उपकरण दिखावे के लिए लगे हैं।

रविवार रात ऑक्सीजन सिलेंडर लीक होने के बाद मौके पर आए प्रभारी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरपी राय ने कहा कि सिलेंडर की आपूर्ति ठीक नहीं हो रही है। इसकी क्वालिटी पर आपूर्ति करने वाली संस्था ध्यान नहीं दे रही है। उनका कहना है कि लीकेज मामले की जांच कराई जाएगी। यह हादसा भीड़ भरे वार्ड या ऑपरेशन थियेटर में होता तो लोगों की जान पर संकट आ सकता है। जिला अस्पताल में 43 सिलेंडर हैं।

घायल स्वीपर भानू का कहना है कि वह सिलेंडर के पास खड़ा था, इसी बीच दो मरीज आए, उन्हें सिलेंडर लगाने की जरूरत थी, मगर जैसे ही वह नीचे झुका, सेफ्टी वाल्व अचानक तेजी से खुल कर उसे लगा। साथ ही गैस की तेज हवा से हाथ सुन्न पड़ गया। नगर कोतवाल अमर सिंह का कहना है सिलेंडर की क्वालिटी पर प्रभारी सीएमएस का बयान जांच का विषय है। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से दूसरे दिन भी कोई शिकायत नहीं दी गई है।
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