अयोध्या। सिंधी विरासत को बचाने व आगे बढ़ाने के लिए सिंधी समाज की महिलाओं ने पुराने सिंधी भजनों व गीतों को प्रस्तुत कर पुरानी सिंधी संस्कृति की याद दिलाई। भक्त प्रह्लाद सेवा समिति व मातृ शक्ति परिवार के विशेष सहयोग से प्रभु झूलेलाल जयंती चेटीचंड की पूर्व संध्या पर रामनगर कॉलोनी स्थित प्रभु झूलेलाल मंच पर सिंधी विरासत (महिला संगीत) की धारा बही। सभी ने सिंधी गीतों व डांडिया पर नृत्य किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ युवा व्यवसायी ज्ञान मोटवानी की बहू यूक्रेन में जन्मी सेराफिमा मोटवानी ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। सेराफिमा ने कहा कि सिंधी संस्कृति, भाषा, खानपान व सिंधी गीत बहुत अच्छे लगते हैं। कार्यक्रम का संचालन समर्पण ग्रुप की संचालिका नीलम मध्यान ने किया।
इस अवसर पर वर्षा मोटवानी, इति मोटवानी, कमला दासवानी, आशा चावला, भानु देवी, समिति के महासचिव ओमप्रकाश ओमी, मुस्कान सावलानी, नीलम मध्यान, शालिनी राजपाल, कशिश वाधवा, कनक चैनानी, आशीष कौर व गीत हासानी सहित सिंधी समाज के बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।
उधर, वरुणावतार झूलेलाल के जयंती पर अवध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह को झूलेलाल की प्रतिमा और मोतियों की झूलेलाल की माला भेंट की गई। अमर शहीद संत कंवरराम साहिब सिंधी अध्ययन केंद्र के मानद निदेशक प्रो. आरकेसिह, सलाहकार ज्ञानप्रकाश टेकचंदानी ‘सरल’ के साथ केंद्र के स्टाफ अमन विक्रम सिंह और अनीता देवी ने यह प्रतिमा भेंट की और कुलपति को झूलेलाल जयंती की शुभकामनाएं दीं।
उन्होंने कहा कि हिंदू नववर्ष पर झूलेलाल की प्रतिमा का प्राप्त होना वे अपने लिए सौभाग्य मानते हैं। कुलपति ने कहा कि दसवीं शताब्दी में झूलेलाल ने अपने बुद्धिकौशल से अपने समाज बंधुओं पर हो रहे अत्याचारों से रक्षा की। यह सुंदर संयोग है कि आज ही हिंदू नववर्ष है, झूलेलाल का जन्मदिवस है, गुड़ी पड़वा पर्व है और आज ही के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का जन्मदिवस भी है। उन्होंने ऐसे सुंदर दिवस पर समाज को अपनी शुभकामनाएं दीं।