अयोध्या। उत्तर प्रदेश पूर्वी नदी एवं जलाशय अनुश्रवण समिति के चेयरमैन न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने शुक्रवार को पर्यावरण के मानकों को दरकिनार कर हुई गड़बड़ियों को लेकर बड़ी कार्रवाई की।
उन्होंने चेतावनी दी कि प्रस्तावित सीता झील की जमीन से चार माह में कूड़ा न हटा तो नगर निगम पर 50 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा। सीता झील की जमीन के राजस्व अभिलेखों में घोटाले की जांच की संस्तुति करते हुए तीन माह में अवैध कब्जा हटवाने के निर्देश दिए।
न्यायमूर्ति डीपी सिंह शुक्रवार को सर्किट हाउस में मंडल व जिले के अफसरों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब थे। उन्हाेंने कहा कि प्रस्तावित सीता झील की निचली जमीन को लेकर राजस्व अभिलेखों में घोटाला किया गया है।
प्रदेश सरकार से इस पर गौर करने और स्वतंत्र एजेेंसी से इसकी जांच कराने के लिए एक पत्र नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को भेजा गया है।
उन्होंने तीन माह में अतिक्रमण हटवाने और इसकी जमीन पर कोई भी नक्शा न पास कराने के लिए भी लिखा है। कहा कि शहर के उत्तर परिक्रमा मार्ग के किनारे अफीम कोठी से राजघाट तक लगभग चार किमी. लंबी और लगभग दो सौ हेक्टेयर में यह झील बनाने का प्रस्ताव है।
सरयू की कछार की इस जमीन को राजस्व अभिलेखों में वेटलैंड (जलमग्न) दिखाया गया है जबकि इस जमीन पर भू-माफिया ने कब्जा कर कई स्थानों पर निर्माण कर लिया है। यह घोटाला है।
उन्होंने खसरा संख्या 57 व 58 से तीन माह के अंदर अतिक्रमण हटवाकर इसे वेटलैंड कराए जाने की संस्तुति की है। कहा कि डीएम अवैध कब्जा करने वालों की सूची सेंट्रल बोर्ड को भेजेेंगे और जुर्माना तय करेंगे।
न्यायमूर्ति डीपी सिंह ने बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता को तीन माह में सीता झील की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहा। बताया कि यदि तीन माह में अतिक्रमण नहीं हटा तो एक अगस्त 2018 से पांच हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना भरना होगा। इस पर अब कोई नक्शा पास नहीं पास किया जाएगा।
उन्होंने इसके पुराने अभिलेखों को खोजने वाले नायब तहसीलदार सफीउल्लाह को स्पेशल एंट्री दिए जाने की संस्तुति भी की है। बताया कि प्रस्तावित झील की जमीन से चार माह में कूड़ा न हटवाने पर नगर निगम पर 50 लाख का जुर्माना लगाया जाएगा।
न्यायमूर्ति ने बताया कि एनजीटी से बगैर अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए सरयू से बालू निकालने को लेकर सिंचाई विभाग पर 25 लाख रुपये जुर्माना लगाया गया है।
साथ ही एक माह में इसे हटवाने के लिए कहा गया है। कैंटोनमेंट बोर्ड में एसटीपी न होने और खुले में कूड़ा रखने को लेकर 63.30 लाख रुपये के जुर्माने की संस्तुति की है।
जलनिगम को एक माह के भीतर शहर के सभी नालों के लिए एसटीपी की डीपीआर तैयार करवाने की संस्तुति की गई है। उन्होंने सोहावल तहसील क्षेत्र के सुरवारी में 10 हेक्टेयर में फैली झील का मनरेगा के तहत जीर्णोद्धार कराए जाने की बात भी कही। इससे पूर्व उन्होंने कमिश्नर मनोज मिश्र, डीएम अनुज कुमार झा, नगर निगम, बाढ़ खंड सहित अन्य विभागों के अफसरों के साथ बैठक की।