अयोध्या। राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में बुधवार रात मरीज के इलाज में लापरवाही बरतने व तीमारदारों से अभद्रता करने वाली चार संविदा नर्सों को मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करके जांच बैठाई है।
इनके स्थान पर नई नर्सों को भर्ती करने के लिए भी कार्यदायी संस्था को निर्देशित किया है। अयोध्या की सप्त सागर कॉलोनी निवासी पवन कुमार द्विवेदी को अस्थमा व अन्य बीमारी होने पर परिजनों ने मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन आईसीयू में भर्ती कराया था।
उनकी बुधवार देर रात हालत गंभीर होने लगी तो डॉक्टर द्वारा बताए गए इंजेक्शन को लगवाने के लिए तीमारदार नर्सों को खोजने लगे। नर्स का ड्यूटी काउंटर खाली मिला और पता चला कि वार्ड में पर्दों से बनाए गए एक कक्ष में वह सभी सो रही हैं।
तीमारदार बाहर खड़े होकर काफी देर तक बुलाते रहे और मिन्नते करते रहे, लेकिन नर्सों की संवेदना नहीं जगी। आरोप है कि इंजेक्शन न लगने से मरीज की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने आक्रोश जताते हुए दोषी नर्स व कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग उठाई।
‘अमर उजाला’ ने 10 जून के अंक में ‘सोती रही नर्स, नहीं लगाया इंजेक्शन, मरीज ने तोड़ा दम’ शीर्षक से मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो हड़कंप मच गया।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शिकायत व खबर को संज्ञान में लेते हुए ड्यूटी पर तैनात आउटसोर्स नर्स सरिता, सबीरून्निशा, आराधना पटेल व सरला को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त दिया। साथ ही मामले की जांच करने के लिए एक कमेटी भी गठित की है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने सेवा प्रदाता कंपनी को पत्र लिखकर इन नर्सों के स्थान पर दूसरी नर्सों को भर्ती करने के लिए भी निर्देशित किया है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन की इस कार्रवाई से स्वास्थ्यकर्मियों में भी खलबली मच गई है।
प्रथम दृष्टया दोषी मिलने पर संविदा नर्सों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। मामले की जांच के लिए एक कमेटी भी गठित की गई है। जो शीघ्र ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। अन्य नर्सों को भी भविष्य में सेवा के प्रति लापरवाही न बरतने के लिए सख्त हिदायत दी गई है।-डॉ. अरविंद सिंह, सीएमएस, राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज