अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 26वें दीक्षांत समारोह में सोमवार को राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि शिक्षण संस्थाएं समाज की ब्रांड एंबेसडर हैं।
छात्र अपने विश्वविद्यालय का ब्रांड एंबेसडर होता है। शिक्षा ग्रहण करने के बाद किसी बड़ी इंडस्ट्री या प्रशासनिक सेवा में जाता है तो उसे याद किया जाता है।
वे विवि के स्वामी विवेकानंद सभागार में दीक्षांत समारोह में बतौर अध्यक्ष संबोधित कर रही थीं। उन्होंने स्नातक व परास्नातक पाठ्यक्रमों में सर्वाधिक अंक पाने वाले 107 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए।
इसमें 30 कुलपति स्वर्ण पदक, 60 कुलाधिपति स्वर्ण पदक, 17 दान स्वरूप पदक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त 1201 स्नातक, परास्नातक उपाधि एवं पीएचडी में 23 उपाधि शोधार्थियों को प्रदान की गईं।
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्र के विकास में विवि का महत्वपूर्ण योगदान होता है। यहां उच्च कोटि की शिक्षा दी जाती है। एक समृद्ध जीवन जीने के लिए शिक्षा का होना जरूरी है। नई शिक्षा नीति में मातृ-भाषाओं पर पर्याप्त बल दिया गया है।
मातृभाषा में शिक्षा दिए जाने से यह विद्यार्थियों को उनकी पसंद के विषय और भाषा को सशक्त बनाने में मदद करेगा। इससे पूर्व सभागार मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित किया गया।
छात्राओं द्वारा वंदेमातरम एवं विवि गीत की संगीतमय प्रस्तुति की गई। समारोह में विवि की वार्षिक स्मारिका एवं वार्षिक प्रतिवेदन का विमोचन किया गया।
कुलपति ने अतिथि का स्वागत पुष्प गुच्छ, श्रीफल एवं स्मृति चिह्न भेंटकर किया। इसके बाद कर्नल एनपी ओला डिप्टी कमांडेंट डोगरा रेजीमेंट सेंटर को कुलाधिपति द्वारा सम्मानित किया गया।
परेड में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए ऋषभ को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान कुलाधिपति द्वारा प्राथमिक विद्यालयों के 30 छात्र-छात्राओं को बैग एवं बुक किट देकर व उनके शिक्षकों को फल देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और विशिष्ट अतिथि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा अपरिहार्य कारणों से नहीं आ पाए। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रयागराज हाईकोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार त्रिपाठी रहे।
समारोह में विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, डीएम नितीश कुमार, एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय, विवि के वित्त अधिकारी सुधीर सिंह, मुख्य नियंता प्रो. अजय प्रताप सिंह, प्रो. चयन कुमार मिश्र, प्रो. नीलम पाठक, उप कुलसचिव विनय कुमार सिंह समेत सभी विभागाध्यक्ष व शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. अशोक शुक्ल ने किया। कुलसचिव उमानाथ ने आभार जताया। राज्यपाल ने कहा कि विवि द्वारा गोद लिए 10 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए एक समिति बनानी होगी जो माह में कम से कम दो बार अवश्य यह देखें कि क्या स्थिति है।
विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए ग्रामसभा मसौधा की महिलाओं को स्वावलंबन हेतु प्रशिक्षित करना कुलपति के उत्कृष्ट कार्यों में से एक है। आशा करती हूं भविष्य में महिला सशक्तीकरण के लिए ऐसे कार्य विवि द्वारा होते रहेंगे।
राज्यपाल ने कहा कि कुलपति द्वारा भाषा विभाग की स्थापना करना सरकार की भाषा संबंधी संकल्प को और दृढ़ करती हैं। भाषा विभाग के अंतर्गत भारतीय भाषाओं में हिंदी सिंधी, पालि के साथ क्षेत्रीय भाषा भोजपुरी और अवधी भाषा का पठन-पाठन केंद्र खोले गए हैं।
क्षेत्रीय भाषा के अध्ययन से क्षेत्र विशेष की भाषा के माध्यम से वहां की अमूल्य साहित्य, संस्कृति और सभ्यता का वैश्विक स्तर पर सम्प्रेषित करने में सफलता प्राप्त होगी।
कुलाधिपति ने महिला सशक्तीकरण पर प्रकाश डालते हए कहा कि महिलाओं का स्वस्थ होना नितांत आवश्यक है। वर्तमान समय में सरकार के अथक प्रयासों से स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है।
बेटी-बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान को व्यापक असर यह हुआ है कि अब बेटियों की जन्म दर में उत्साह वर्धक वृद्धि देखी गई है। अब प्रति एक हजार व्यक्ति पर एक हजार 17 महिलाएं जन्म ले रही हैं।
संस्थागत डिलेवरी में 67 प्रतिशत से बढ़कर 83 प्रतिशत हो गया है, लेकिन अभी भी सुधार होने की जरूरत है। उन्होंने बच्चों के टीकारण में 30 प्रतिशत की जरूरत बताई है। इसके साथ ही एनीमिक गर्भवती महिलाओं की दशा में सुधार लाए जाने की बात कही।
विवि के कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह ने कहा कि विद्यालय द्वारा विद्यार्थियों को शोध एवं पठन-पाठन की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। विश्वविद्यालय 43 वर्षों बाद नैक मूल्यांकन में बी-ग्रेड प्राप्त हुआ।
विश्वविद्यालय परिवार ने नैक ए-ग्रेड के लिए तैयारियां शुरू कर दी है। कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार की मंशा के अनुरूप उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के लिए विश्वविद्यालय ने सत्र 2021-22 से परिसर एवं संबद्ध महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू कर दिया है। इसके तहत परिसर एवं संबद्ध महाविद्यालयों में प्रवेश तथा पठन-पाठन कार्य कराया जा रहा है।