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एक करोड़ खर्च कर नरेंद्रालय में फिर शुरू होंगी सांस्कृतिक गतिविधियां

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अयोध्या। शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों का सबसे बड़ा केंद्र रहा नरेंद्रालय को एक बार फिर से खुलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। एक करोड़ रुपये से नई कार्ययोजना तैयार होगी।
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पूरे नरेंद्रालय को वातानुकूलित बनाए जाने के साथ पार्किंग स्थल व बाहरी मैदान को गार्डन का स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इसमें नगर निगम की टीम पिछले एक पखवारे से कसरत कर रही है।
शहर के नरेंद्रालय के भुगतान विवाद के निपटारे के बाद नई कार्ययोजना तैयार कराई जाएगी। नगर निगम प्रशासन लगभग एक करोड़ रुपये खर्च करेगा। दो चक्र कार्यदायी संस्था से नगर निगम के अधिकारी वार्ता कर चुके हैं।
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इसमें यह तय किया जा रहा है कि पुराने भुगतान के मामले को सुलझा कर नए सिरे से नरेंद्रालय का जीर्णोद्धार कराकर उसको आमजन के लिए खोला जा सके। जिससे शहर में बंद पड़ी सांस्कृतिक गतिविधियां व रंगमंच फिर से जिंदा हो सके।
शहर का नरेंद्रालय 90 के दशक से लेकर 2005 तक सांस्कृतिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र रहा। यहां राष्ट्रीय स्तरों के साहित्यिक सम्मेलनों से लेकर कवि सम्मेलन, रंगमंच के बड़े थियेटर व सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन होता था।
इसका उपयोग सरकारी स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों के लिए भी होता था। नरेंद्रालय के दो कार्यक्रम काफी प्रसिद्ध हुआ करते थे। विजय कुमार की ओर से रक्षाबंधन समारोह व जीवन ज्योति संस्थान का हास्य हंगामा कार्यक्रम काफी लोकप्रिय हुआ था।
इन दोनों कार्यक्रमों ने शहर की सांस्कृतिक गतिविधियों को नई पहचान दी थी। इसके साथ ही रंगमंच के रिहर्सल का यह सबसे प्रमुख स्थान रहा है। वर्ष 2003 में नरेंद्रालय की बिल्डिंग खराब होने लगी।
इसका सबसे बड़ा कारण रहा कि यहां शादी-विवाह के कार्यक्रम भी संपन्न होने लगे। वर्ष 2008 में नरेंद्रालय में कार्यक्रमों पर रोक लगाते हुए जीर्णोद्धार का काम शुरू हुआ।
चार माह चले जीर्णोद्धार के काम में कार्यदायी संस्था की 42 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की फाइल नगर पालिका फैजाबाद को सौंप दी। इस पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने जांच कराने का निर्णय लिया।
वर्ष 2013 में तत्कालीन जिलाधिकारी रहे विपिन कुमार द्विवेदी के हस्तक्षेप से एक बार फिर से नरेंद्रालय को आबाद करने की कवायद शुरू हुई। पुराने बकाया भुगतान को लेकर भी बातचीत हुई लेकिन कार्यदायी संस्था के न्यायालय चले जाने से मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
अब लगभग 12 वर्ष बीतने को हैं लेकिन नरेंद्रालय बंद पड़ा हुआ। इस सबके दृष्टिगत नगर निगम प्रशासन ने एक बार फिर से नरेंद्रालय भुगतान के विवाद को खत्म कर नए नरेंद्रालय को आबाद करने की योजना बनाई है।
कार्यकारिणी में यह मामला तय हो चुका है। इससे लिए निर्माण विभाग के अफसरों को लगाया गया है कि भुगतान के विवाद को खत्म कराकर नए सिरे से नरेंद्रालय का निर्माण कराएं।
जिससे शहर में सांस्कृतिक गतिविधियां फिर से संचालित हो सकें। नगर निगम के निर्माण विभाग के अफसर दो चक्र बैठकें कर चुके है। कोशिश यह की जा रही है कि पुराने भुगतान का मामले का निपटारा कराया जा सके।
शहर के रंगमंच कर्मी राजेश सिंह मानव बताते हैं कि यह नगर निगम की अच्छी पहल होगी। रंगमंच कर्मी आफाक अहमद बताते हैं कि अयोध्या में एक बार फिर से रंगमंच जिंदा हो जाएगा।
नगर निगम की कार्यकारिणी में प्रस्ताव पास होने के बाद नरेंद्रालय को फिर से शुरू किए जाने की कवायद शुरू हो चुकी है। दो चक्रों में अब तक बैठकें हो चुकी हैं। कोशिश यह की जा रही है कि पुराने भुगतान के विवाद को खत्म कर नए सिरे से जीर्णोद्धार का काम कराया जाए। इसमें लगभग एक करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।- एमएन झा, अधिशासी अभियंता, नगर निगम अयोध्या
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