कंट्रोलर के आदेश पर पीड़ित गार्ड आरपीएफ, जीआरपी और जिला पुलिस के थानों पर चक्कर लगाता रहा, लेकिन प्रभारियों ने एक दूसरे के क्षेत्र का मामला बताते हुए मुकदमा दर्ज करने से हाथ खड़े कर दिये। ऐसे में गार्ड बैरंग लौट गया।
बता दें शुक्रवार को फैजाबाद होते हुए अहमदाबाद जाने वाली अप साबरमती एक्सप्रेस शाम 18:18 बजे गोसाईगंज पहुंची थी। दो मिनट बाद सिग्नल मिलते ही गार्ड के एल यादव ने जैसे ही चालक को सिग्नल दिखाकर ट्रेन को चलाना चाहा वैसे ही एक युवक ने अपने कुछ परिवारीजनों के न आने का हवाला देते हुये गार्ड से ट्रेन को कुछ देर और रोकने के लिए कहा।
गार्ड ने असमर्थता जाहिर की तो युवक गार्ड का वॉकी-टॉकी छीनकर चलता बना। गार्ड ने चिल्लाते हुए युवक के पीछे दौड़ा। इसी बीच जुटी भीड़ ने भाग रहे युवक को पकड़ लिया तथा गार्ड के हवाले कर दिया।
गार्ड का वॉकी-टॉकी वापस दिलाया। इससे साबरमती 14 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। कंट्रोलर के निर्देश पर गार्ड ने आरपीएफ व जीआरपी फैजाबाद को तहरीर देकर मामला दर्ज कराना चाहा तो प्रभारियों ने अकबरपुर क्षेत्र का मामला बताते हुये पल्ला झाड़ लिया।
जीआरपी अकबरपुर प्रभारी ओमप्रकाश गौतम का कहना है कि ट्रेन लेट होने पर चालक व गार्ड अक्सर ऐसे बहाने बनाते है। गोसाईगंज में छीना गया वॉकी-टॉकी का मामला आरपीएफ क्षेत्र का है। गार्ड शनिवार को आया था। उसे आरपीएफ के पास भेजा था।
आरपीएफ प्रभारी अकबरपुर राम केवल रावत का कहना है कि वॉकी-टॉकी छीनने की रिपोर्ट दर्ज कराने गार्ड आया था। मामला चोरी और लूट का नहीं छिनैती का था। ऐसे में गार्ड को सिविल पुलिस के पास जाना चाहिए।
गोसाईगंज कोतवाली के कोतवाल नरेंद्र सिंह बोले कि रेलवे स्टेशन पर यात्रियों और कर्मियों के साथ घटना होने पर उसे जीआरपी या आरपीएफ देखती है। इससे सिविल पुलिस का कोई मतलब ही नहीं है।