एनआरएचएम घोटाले में फिर गाज गिरनी शुरू हो गई है। सीएमओ के प्रधान लिपिक को स्वास्थ्य महानिदेशालय ने निलंबित करने का आदेश दिया है जबकि घोटाले से जुड़े जिला अस्पताल के एक डॉक्टर के खिलाफ सीबीआई की विशेष अदालत से समन जारी हुआ है। हालांकि इन कार्रवाइयों को पुलिस व स्वास्थ्य महकमा दबाए हुए है।
स्वास्थ्य महानिदेशालय से आए आदेश के मुताबिक मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय के लेखानुभाग के प्रधान लिपिक रामफेर भारती ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खंडासा में लिपिक के पद पर वर्ष 2009-10 में तैनाती के दैारान जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के लाभार्थियों को मिलने वाले धन से 4 लाख रुपये विड्रॉल कर लिए।
इसी दौरान सीएचसी खंडासा के अधीन बनने वाले चार उपकेंद्रों के नाम पर 21 लाख रुपये से अधिक धनराशि बगैर काम हुए ही निकाल ली गई। आज तक उपकेंद्र नहीं बने। सीबीआई जांच में यह मामला खुला और चेक व विड्रॉल फॉर्म पर दस्तखत करने वाले तत्कालीन सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय सिंह भी लपेटे में आ गए।
सीबीआई गाजियाबाद की विशेष कोर्ट ने उनको हाजिर होने के लिए समन जारी कर दिया है। डॉ. सिंह महिला जिला अस्पताल में बेहोशी के डॉक्टर के रूप में तैनात हैं। एक सप्ताह से अस्पताल छोड़कर लापता हैं।
सीएमओ डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य महानिदेशालय ने प्रधान लिपिक रामफेर भारती को दो दिन पहले ही निलंबित कर दिया है। उन पर खंडासा सीएचसी में तैनाती के दौरान जेएसवाई व उपकेंद्र निर्माण में फर्जी तरीके से धन निकालने का आरोप है। जांच रिपोर्ट व कार्रवाई का आदेश मिल गया है।
सीएमओ ने खंडासा थाने में केस दर्ज करने की दी तहरीर : सीएमओ कार्यालय के प्रधान लिपिक रामफेर भारती के खिलाफ केस दर्ज कराने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। खंडासा सीएचसी के चार उपकेंद्र बगैर बने सरकारी धन हजम करने के मामले में स्थानीय भाजपा विधायक बाबा गोरखनाथ ने रिपोर्ट दर्ज कराकर कार्रवाई की मांग की थी।
विधायक ने विभाग के अवर अभियंता एसपी सिंह पर भी कार्रवाई की मांग उठाई है, कहा है कि धन की निकासी बगैर जेई की रिपोर्ट के नहीं हो सकती थी। सीएमओ डॉ. अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि मौके पर चारों उपकेंद्र अधूरे पड़े हैं जबकि पूरा धन निकल चुका है। निर्माण में उजागर हुई अनियमितता के आधार खंडासा पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करने के लिए शनिवार को तहरीर दी गई है। अभी तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है।
फर्जी दवा व उपकरण खरीद में भी लाखों का गोलमाल : सीएमओ के प्रधान लिपिक रामफेर भारती की कारस्तानी की लिस्ट बढ़ती जा रही है। निदेशालय से हो रही एक अन्य जांच में उनके खिलाफ लेखानुभाग में प्रधान लिपिक रहते वर्ष 2012-13 से वर्ष 2016-17 तक पांच साल में कई सीएचसी व उपकेंद्रों के लिए उपकरण व दवाओं की खरीद में लाखों की गड़बड़ी पाई गई है।