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एनडी विवि के सुरक्षा गार्ड ने वेतन न मिलने से लगाई फांसी

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कुमारगंज। नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज में तैनात एक सुरक्षा गार्ड का शव मंगलवार सुबह ऑडिटोरियम हॉल के पीछे संदिग्ध परिस्थितियों में पेड़ से लटकता पाया गया।
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घटनास्थल से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें गार्ड ने मौत का जिम्मेदार विश्वविद्यालय की ओर से नौ माह की बकाया मजदूरी न मिलना बताया है।

रुदौली थाना क्षेत्र के बारी गांव निवासी शिवबालक प्रजापति (52) कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज में दैनिक वेतनभोगी सुरक्षाकर्मी के पद पर तैनात था।

बीते सोमवार को शिवबालक रोज की तरह ड्यूटी करने आया था। मंगलवार को ऑडिटोरियम हॉल के पीछे नीम के पेड़ पर रस्सी के सहारे उसका शव को हॉस्टल के छात्र ने देखा।

उसने इसकी जानकारी 100 नंबर पर दी। सूचना के बाद कुमारगंज पुलिस के साथ विश्वविद्यालय कर्मी भी घटनास्थल पर पहुंचे। मृतक के साथी कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर आक्रोश व्यक्त किया।
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थानाध्यक्ष कुमारगंज नीरज राय ने मामले की छानबीन शुरू करते हुए इसकी सूचना उच्चाधिकारियों को दी। तलाशी लेने पर मृतक के पास से एक सुसाइड नोट मिला।

इसमें गार्ड ने आत्महत्या का कारण बीते नौ माह से मजदूरी का भुगतान न होना बताया है। पुलिस ने गार्ड का शव उतरवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि मृतक की पत्नी की हाल ही मौत हो गई थी, जिसके बाद से वह अवसाद में था। दूसरी ओर विश्वविद्यालय के कर्मचारियों में घटना को लेकर आक्रोश है।

सभी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को इस घटना का जिम्मेदार बताते हुए कर्मचारियों को उनका बकाया वेतन भुगतान की मांग की है। थाना प्रभारी नीरज राय का कहना है कि मामले की जांच की जा रही।

विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी उमेश पाठक ने बताया कि उन्हें मानदेय के संबंध में जानकारी नहीं है। मामले में जांच समिति गठित कर सही जानकारी की जाएगी।

बच्चे भी बेरोजगार हैं...
सुसाइड नोट में गार्ड शिव बालक ने लिखा कि वह मजबूरी से आत्महत्या कर रहा है। दवा की सख्त जरूरत है। बीते मार्च से आज तक विश्वविद्यालय की ओर से मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया है। बच्चे भी बेरोजगार हैं। खुदकुशी के सिवाय और कोई चारा नहीं है।

वित्त नियंत्रक व कुलपति के बीच खींचतान से लटके भुगतान
विश्वविद्यालय में अधिकारियों व कर्मचारियों के बीच चल रही खींचतान से तमाम भुगतान लटके है। विश्वविद्यालय सूत्र बताते हैं कि पिछले कुछ समय से कुलपति प्रो. हसीब अख्तर व वित्त नियंत्रक के बीच तालमेल ठीक नहीं थे।

जिससे कुलपति ने कुछ दिन पूर्व ही पूर्व वित्त नियंत्रक को भानु प्रकाश को रिलीव कर उनका चार्ज रजिस्ट्रार डॉ. पीके सिंह को सौंप दिया है।

मजदूरी के लिए फाइल पूर्व में ही वित्त नियंत्रक के यहां से कुलपति के पास भेजी गई थी, किन्हीं कारणों से अभी तक उस फाइल पर भुगतान की स्वीकृति नहीं हो सकी।
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इसकी वजह से यह घटना हुई। कर्मचारियों के अनुसार इसी तरह सैंकड़ों कर्मचारियों का वेतन भुगतान अभी नहीं हो सका है।
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