इन परिवारों के स्त्री-पुरुष और बच्चे खुले में नित्यक्रिया को जाते हैं। यह खुलासा पालिका की ओर से कुछ महीने पहले कराये गए सर्वे में हुआ है। यही नहीं 25 वार्डों में से मात्र सात में ही घर-घर कूड़ा उठाने का इंतजाम हो पाया है। ऐसे में 17 दिनों तक शुरू हो रहे स्वच्छ भारत अभियान में व्यवस्थाओं को लेकर नगरपालिका कितनी कारगर होगी, समय बताएगा।
फैजाबाद नगर में स्वच्छता की बात करें तो कड़वा सच यह है कि पालिका क्षेत्र के 2163 घरों में प्रसाधन ही नहीं है। इस बाबत बीते दिनों निदेशक, नगर विकास विभाग की नगरपालिका चेयरमैन से वीडियो कांफ्रेंसिंग भी हुई थी। निदेशक को जमीनी सच्चाई से अवगत कराया गया था।
नगर में स्वच्छता की सच्चाई यह है शहर में करीब 60 टन कचरा प्रतिदिन निकल रहा है। पालिका इसमें से 45 से 50 टन कचरा ही उठा पाती है। उठाया गया कचरा या तो नगर क्षेत्र में कुछ खाली स्थानों पर डंप कर बाद में उठाया जाता है या फिर माझा क्षेत्र और नगर से बाहर मुख्य मार्ग के किनारे फेंका जा रहा है।
शहर में लोगों ने अपने मकान तो खड़े किये, लेकिन तमाम लोग प्रसाधन ही नहीं बनवा सके। सर्वे में ऐसे 2163 परिवारों के पास प्रसाधन की सुविधा नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से शौचालय बनाने के लिए मिल रही मदद पाने को 3080 लोगों ने आवेदन कर रखा है।
मजबूरी में ऐसे परिवारों के सदस्य खुले में शौच को जा रहे हैं या फिर सरकारी प्रसाधनों का उपयोग करते हैं। यह बहू-बेटियों के लिए शर्मिंदगी भरा तो है ही, प्रशासन की कार्यशैली पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।
पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्मदिन 25 सितंबर से लेकर लोकनायक जयप्रकाश नारायण के जन्मदिन 11 अक्तूबर तक प्रदेश के नगरों में शुक्रवार से स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत हो रही है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती भी दो अक्तूबर को होगी। अभियान को परवान चढ़ाने के लिए स्वच्छता के क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य करती संस्थाओं, व्यक्तियों को सम्मानित करने, बच्चों के बीच विवेकाधारित वाद-विवाद-दौड़ प्रतियोगिता कराने, नगरों में सफाई कार्यक्रम चलाने का निर्देश दिया गया है।