जन्माष्टमी में घर में कृष्ण व राधा के स्वरूप में सजे बच्चे।
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अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि परिसर में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व भव्यता पूर्वक मनाया गया। रामलला के टेंट से बाहर निकल कर अस्थाई मंदिर में विराजने के बाद पहली बार रामलला के दरबार में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन हुआ। अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र के संयोग के बीच जैसे ही रात्रि के 12 बजे संपूर्ण रामजन्मभूमि परिसर कृष्णभक्ति में डूब गया।
भये प्रगट गोपाला दीन दयाला यसुमति के हितकारी। हर्षित महतारी रूप निहारी मोहन मदन मुरारी...की स्तुति गूंजने लगी। घंटा, घड़ियाल बजने लगा। प्राय: रामभक्ति में लीन रहने वाले परिसर में मौजूद सुरक्षाकर्मी कृष्णभक्ति में लीन होकर भगवान कृष्ण की स्तुति करने लगे।
भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव राम जन्मभूमि में ऐसे ही मनाया जाता है, जैसे भगवान राम का जन्म उत्सव मनाया जाता है। करीब तीस वर्षों बाद रामलला के टेंट से बाहर निकलकर अस्थाई मंदिर में विराजित होने पर यह पहला अवसर था जब श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पूर्व मनाया गया।
राममंदिर निर्माण शुरू होने की खुशी में इस पर्व को भव्यता पूर्वक मनाने की तैयारी थी लेकिन कोरोना की गाइडलाइन के चलते उत्सव सीमित आयोजनों के बीच ही मनाया गया। इससे पूर्व रामलला का पंचामृत स्नान कर, नवीन वस्त्र धारण कराकर रामलला का भव्य शृंगार किया गया। तीन तरह की पंजीरीयों, ऋतु फल और व्यंजनों से रामलला का भोग लगाया गया।
राम जन्मभूमि के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने बताया कि राम जन्मभूमि पर भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव उसी तरीके मनाया जाता है जिस तरह भगवान राम का जन्म उत्सव मनाया जाता है। इस दरमियान भगवान को सिंघाड़े की पंजीरी, राम दाने की और धनिया की पंजीरी का भोग लगाया गया। बताया कि रात्रि में 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाकर अगले दिन सुबह रामलला का दर्शन करने आने वाले भक्तों को प्रसाद भी वितरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भगवान राम व कृष्ण में अभिन्नता प्रतिपादित है दोनों एक ही हैं। भगवान ने दोनों ही अवतारों में आकर धर्म की स्थापना की है।