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110 आशा बहुओं पर लटकी कार्रवाई की तलवार

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अयोध्या। कोरोना संक्रमण काल में निजी अस्पतालों में सेवाएं ठप होने के बावजूद सरकारी अस्पतालों में गत वर्ष की अपेक्षा 1975 प्रसव कम होने से जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। जिलाधिकारी की नाराजगी के बाद एक वर्ष में एक भी प्रसव न कराने वाली 50 सहित 110 आशा बहुओं को चिह्नित कर सेवा समाप्त करने की तैयारी की जा रही है।
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जिले के 13 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 27 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व 246 स्वास्थ्य उपकेंद्र सहित जिला महिला अस्पताल, तुलसी महिला अस्पताल, छह अरबन स्वास्थ्य केंद्र व राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज में संस्थागत प्रसव की सुविधा है। गांवों में तैनात आशा बहू व एएनएम को गर्भवती महिलाओं से संपर्क कर उनके नियमित टीकाकरण, समय-समय पर आवश्यक जांचें कराते हुए उनका प्रसव संबंधित स्वास्थ्य इकाई पर कराने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके लिए उन्हें पारिश्रमिक भी दिया जाता है। गत वर्षों में इसका खासा लाभ जिले को मिला और आशा बहुओं की मदद से संस्थागत प्रसव के मामले संतोषजनक रहे।
इधर, कोरोना संक्रमण काल में हुए लॉकडाउन के दौरान सभी निजी अस्पतालों में सेवाएं बाधित हो गईं। ऐसे में सरकारी अस्पताल ही हर प्रकार की आकस्मिक सेवाओं के लिए आमजन का सहरा बने। प्रसव के लिए एकमात्र विकल्प होने की वजह से इन अस्पतालों में प्रसव में तो अमूमन इजाफा होने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन हुआ एकदम उल्टा। अप्रैल माह से दिसंबर, 2020 तक की प्रसव की रिपोर्ट बनी तो संस्थागत प्रसव की स्थित काफी निराशाजनक नजर आई। इसी अवधि में गतवर्ष की अपेक्षा 1975 संस्थागत प्रसव कम नजर आए तो अफसरों ने कड़ी नाराजगी जताई। साथ ही आशा बहुओं की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हुए।
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जिला स्वास्थ्य समिति की बीते दिनों हुई बैठक में जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने भी नाराजगी जताते हुए खराब प्रदर्शन करने वाली आशा बहुओं को चिह्नित करने का निर्देश दिया था। जिस क्रम में जिले के विभिन्न इलाकों में तैनात आशा बहुओं की कार्यशैली की पड़ताल हुई तो 50 आशा बहू ऐसी मिलीं, जिन्होंने इस अवधि में एक भी प्रसव नहीं कराया। जबकि 60 आशा बहुएं सिर्फ एक-एक प्रसव ही करा सकीं। प्रसव में आई कमी को इसे एक मजबूत कारण मानते हुए इन 110 आशा बहुओं की सेवा समाप्ति की तैयारी चल रही है।
गतवर्ष की अपेक्षा इस बार संस्थागत प्रसव में कमी आई है। करीब 110 आशा बहुएं चिह्नित की गई हैं, जिन्होंने प्रसव में दिलचस्पी नहीं ली। इन पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।- डॉ. घनश्याम सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी, अयोध्या
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