अयोध्या। पृथक पूर्वांचल राज्य के गठन की दशकों पुरानी मांग गुरुवार को राम की पैड़ी पर एक भव्य सांस्कृतिक आंदोलन का रूप लेती नजर आई। पूर्वांचल राज्य जनांदोलन के आह्वान पर दर्जनों संतों की उपस्थिति में तमाम सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं ने 11 हजार दीप प्रज्वलित कर केंद्र सरकार तक पृथक पूर्वांचल राज्य गठित करते हुए राज्य का नाम कौशल रखने और अयोध्या को राजधानी बनाये जाने की मांग एक अलौकिक रूप में प्रस्तुत की। जिसमें हे री सखी महिला मंडल द्वारा घाटों पर सजाई गई रंगोली अद्भुत छटा बिखेर रही थी।
पीआरजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुज राही हिंदुस्तानी ने बताया कि संगठन सात वर्षों से रेल रोको आंदोलनों एवं अनशनों के माध्यम से सरकार के सामने पृथक पूर्वांचल राज्य गठित करने की मांग रखता आया है। हाल ही में राम जन्म भूमि विवाद के पटाक्षेप के बाद अयोध्या को राजधानी बनाये जाने के पक्ष में तमाम तथ्यों के दृष्टिगत अयोध्या से एक वृहद सांस्कृतिक आंदोलन के आगाज के रूप में आज इस दीपदान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संगठन की मुख्य राष्ट्रीय महासचिव वंदना रघुवंशी ने कहा कि हम राज्य गठन की मांग को एक सांस्कृतिक आंदोलन से जीतने का आज संकल्प ले रहे हैं।
स्वामी राघवेश दास ने कहा कि अयोध्या का संत समाज इस आंदोलन का समर्थन ही नहीं कर रहा वरन इस आंदोलन के साथ एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने के लिए संकल्पित है। महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने कहा कि भव्य राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने से हमारे राजा राम को उनका महल तो मिल गया लेकिन राजधानी के बिना अयोध्या अधूरी है। ऐसे में अयोध्या को कौशल राज्य की राजधानी बनाये जाने की मांग से संत समाज हर्षित है और आंदोलन के साथ खड़ा है।
करपात्री जी महाराज ने कहा कि मैँ जल्द ही इस मांग पत्र के साथ राज भवन लखनऊ के लिए पद यात्रा करूँगा। कार्यक्रम में महंत कौशल किशोर शरण फलाहारी, जगतगुरु राम दिनेशाचार्य, महंत डॉ. सत्येंद्र दास वेदांती, नम्रता श्रीवास्तव, मनीषा शुक्ला, कैलाश मिश्रा, आशीष पांडेय, डॉ. वीरेंद्र त्रिपाठी, संयोजक मंडल से राजेश पांडेय, रंगी लाल भास्कर, नरेंद्र पूर्वांचली, वंदना पांडेय, सरिता शुक्ला, अपराजिता सिन्हा, प्रतिभा सिंह, दीपमाला, रश्मि सिंह आदि मौजूद रही।