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ईमाम अस्करी को शहादत पर दिया पुरसा

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अयोध्या। करबला के 72 शहीदों की याद में अय्यामे अजा के आखिरी दिन सोगवार गम में डूबे रहे। सुबह से घरों में शुरू हुआ मजलिस, मातम व नौहाख्वानी का दौर दिनभर चलता रहा। सभी ने जंजीरी मातम व कमा लगाकर इमाम अस्करी अस. की शहादत में पुरसा पेश किया।
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शहर में हर साल मोहर्रम माह के दो माह आठ दिन अकीदतमंद जुलूस निकालकर नौहाख्वानी कर करबला के शहीदों की याद में गम का इजहार करते थे। मगर इस बार कोविड-19 के चलते न तो जुलूस निकले और न ही बड़ी मजलिसें आयोजित हो सकीं। रविवार को अय्यामे अजा के आखिरी दिन चुप ताबूत का जुलूस भी नहीं उठा।
अकीदतमंदों ने प्रतीकात्मक रूप से खजूर की मस्जिद पहुंचकर ताजिये रखे। बाहरी अंजुमनों ने जुलूस भी नहीं निकला। इसके इतर शहर की मुकामी अंजुमन ने अपने-अपने घरों में मजलिस व मातम कर करबला के 72 शहीदों की याद में पुरसा दिया। इमामबाड़े में शहर की मुकामी अंजुमन गुंचाये मजलूमियां ने जंजीरी मातम व कमा लगाकर इमाम अस्करी को पुरसा दिया।
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वहीं, दूसरी ओर शहर के राठहवेली, खुर्द महल, वजीरगंज, नाका मकबरा में दिनभर घरों में मजलिस व मातम का दौर जारी रहा। शाम को चांद निकलने के बाद दो माह तक चले अय्यामे अजा की समाप्ति हो गयी। अब अकीदतमंद नए कपड़े, लड़कियां व औरतें चूड़ी व जेवर पहन लेंगी। साथ ही सोमवार को नवरोज पर्व मनाया जाएगा।
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