अयोध्या। राममंदिर पर फैसला आने के बाद अयोध्या के पौराणिक विरासत को सहेजने का प्रयास केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा है। इसी क्रम में अहमदाबाद के बाद विश्व धरोहर (वर्ल्ड हेरिटेज सिटी) का गौरव हासिल करने वाला अयोध्या दूसरा शहर हो सकता है।
यूनेस्को द्वारा तए किए गए 10 मानकों में से सात पर अयोध्या खरी उतरती है। इसके लिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है। इसके आधार पर बनीं 400 पन्नों की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। इसके साथ ही नगर निगम के साथ मिलकर एक टीम भी गठित की जा चुकी है। शीघ्र ही इसकी बैठक होगी। माना जा रहा है कि अगले दो वर्षों में अयोध्या को यह गौरव मिल सकता है।
रामनगरी वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के तौर पर प्रतिष्ठित हो सकती है। किसी नगर को विश्व धरोहर नगरी घोषित करने के लिए यूनेस्को ने जो दस मानक निर्धारित हैं, अयोध्या उन पर तकरीबन खरी उतरती है। अब इसके लिए मुहिम को तेज करने की तैयारी है। बीते कुछ माह के जमीनी सर्वेक्षण के बाद यह टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि रामनगरी में वह सारी संभावनाएं निहित हैं, जिसके चलते वह वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बन सकती है।
यह सर्वेक्षण अंतिम दौर में है। मिसाल के तौर पर कनकभवन, हनुमानगढ़ी और वाल्मीकि रामायण भवन जैसे मंदिर है। यह मानक सप्तहरियों के पौराणिक मंदिरों से भी परिपूर्ण होता है। पौराणिक परंपरा के अनुसार लाखों वर्ष पूर्व महाराज मनु के समय से ही नगरी की ऐतिहासिकता है और यदि आधुनिक इतिहास की दृष्टि से देखें तो भी नगरी की प्राचीनता नौवीं शताब्दी ईसा पूर्व से प्रमाणित है।
सरयू के जमथरा के तट से लेकर संत तुलसीघाट तक सर्वे के दौरान सेटेलाइट से अयोध्या का जो भूदृश्य प्राप्त हुआ, वह नौका की शक्ल में है और यह चित्र अयोध्या के संस्थापक माने जाने वाले मनु की उस परंपरा को जीवंत करता है जिसमें पुराण बताते हैं जल प्रलय के दौरान मनु नौका से अयोध्या के तट पर पहुंचे थे।
इन मानकों पर खरी उतरती है अयोध्या
रामनगरी अयोध्या यूनेस्को द्वारा निर्धारित 10 मानकों में से सात पर खरी उतरती है। अयोध्या की ये कुछ विशेषताएं हैं जो वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के रूप में प्रतिष्ठापित करने का आधार बनेगी। उनमें कनकभवन, हनुमानगढ़ी, चंद्रहरि, नागेश्वरनाथ और बड़ी छावनी, छोटी छावनी मठ उल्लेखनीय है। कनकभवन को लेकर मान्यता है कि यह माता सीता को मुंह दिखाई में मिला था। हनुमानगढ़ी रामनगरी के सिद्धपीठों में अहम है।
नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना महाराज कुश ने की थी। वाल्मीकि रामायण भवन में संगमरमर की दीवार पर रामायण के 24 हजार श्लोक दर्शाए गए हैं। यह भारत में केवल एक मात्र ऐसी जगह है। अयोध्या सभी धर्मों का प्रतिनिधित्व भी करती है। यहां हजारों हिंदू मंदिर, 100 मुुुस्लिम स्थान व मस्जिद, सिख गुरुद्वारा, पांच जैन मंदिर व प्राचीन बौद्ध स्थल हैं। यहां मुस्लिम समुदाय के सूफियों की कब्र भी हैं। अयोध्या की रामलीला पहले ही यूनेस्को में शामिल हो चुकी है।
अयोध्या को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी बनाने के लिए अब तक 24 सेमिनार हो चुके हैं। यूनेस्को की टीम भी अयोध्या का दौरा कर चुकी है। सर्वे की रिपोर्ट भी शासन को भेजी जा चुकी है। शासन की तरफ से एक टीम भी गठित की जा चुकी है। परिस्थिति तंत्र व जैव विविधता के फलक पर रामनगरी की अनदेखी करना कठिन है। अगले दो वर्षों में अयोध्या वर्ल्ड हेरिटेज सिटी में शामिल हो जाएगी।
आचार्य मनोज दीक्षित, कुलपति, अवध विश्वविद्यालय