फैजाबाद। धनतेरस पर मनपसंद वैरायटी पाने के लिए खरीददारों ने सोने-चांदी के सिक्के-नोट से लेकर जेवरों व अन्य सामान की बुकिंग शुरू कर दी है। लक्ष्मी-गणेश के सिक्के व चरण पादुका की खूब डिमांड है। पिछले साल की अपेक्षा अबकी बार सोने-चांदी के गहने व सिक्के के रेट में काफी कमी आई है। ऐसे में सोने-चांदी में नरमी से सराफा बाजार चमक रहा है। सोमवार को पूरे दिन दुकानों पर कहीं सास-बहू, तो कहीं मां-बेटी अपनी पसंद के गहने व अन्य सामान पसंद करने को लेकर उत्साहित दिखीं। इन लोगों ने बताया कि खरीदेंगी तो धनतेरस के शुभ मुहूर्त पर ही, लेकिन पसंद करके कुछ एडवांस देकर बुकिंग पहले से कर देेंगी। जिससे कि त्योहार के दिन दुकान पर भीड़ में परेशान न होना पड़े। सराफा व्यवसायी नरेश अग्रवाल कहते हैं कि लोगों को सोने व चांदी के दाम बढ़ने की आशंका है, लिहाजा दो दिन में ही दो करोड़ रुपये के गहनों की बुकिंग हो चुकी है। बाजार में पिछले साल सोने का रेट 31 हजार 200 रुपये प्रति दस ग्राम था, जबकि चांदी 49 हजार रुपये प्रति किलो थी। जबकि इस बार सोना अभी 27 हजार 700 रुपये व चांदी 39 हजार रुपये में बिक रही है।
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सामान मात्रा फायदा
अंगूठी 5 ग्राम 1500
हार 30 ग्राम 9 हजार
कंगन 40 ग्राम 12 हजार
मंगलसूत्र 35 ग्राम 10500
रहें सतर्क, 40 प्रतिशत का दे रहे जेवर
सराफा व्यापारी रजनीश अग्रवाल कहते हैं कि धनतेरस पर ग्राहक को सतर्क रहना होगा, नहीं तो ठग जाएंगे। मिलावटी माल यहां भी खूब छाया हुआ है। चांदी के जेवर में 40 से 50 प्रतिशत ही असली चांदी होने के मामले सामने आ रहे हैं। जबकि सोने में भी 67 से 70 प्रतिशत ही शुद्धता का माल बेचा जा रहा है। ऐसे में हर हाल में हॉलमार्क ज्वेलरी ही खरीदें। ये ज्वैलरी 80 से 91.60 प्रतिशत शुद्ध सोने की बनती है। जानी-पहचानी दुकान पर ही खरीद श्रेयष्कर रहती है, क्योंकि बाद में गड़बड़ी मिलने पर ग्राहक उससे जवाब-तलब के साथ सुधार करा सकता है।
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ब्रांडेड सिक्के ही खरीदें
खासकर चांदी के सिक्के में खूब मिलावट बताई जा रही है। ऐसेे में जानकार ब्रांडेड सिक्के ही खरीदने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि जब आप बाजार दर पर भुगतान कर रहे हैं, तो फिर असली सोने-चांदी की पक्की गारंटी वाले सिक्के ही क्यों न खरीदें। इसके लिए सबसे पहले बैंक से कोशिश करें, यदि दुकान से लेना हो तो लोकल मेड सिक्के के बजाय ब्रांडेड खरीदें। वैसे बाजार में वैरायटी के नाम पर लक्ष्मी-गणेश के सिक्के हों या नोट खूब बेचे जा रहे हैं, मगर इन पर न हॉलमार्क हैं और न ही ये ब्रांडेड हैं।
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हर हाल में लें पक्की रसीद
डिप्टी कमिश्नर प्रशासन वाणिज्य कर गुलाब चंद्र का कहना है कि अक्सर सराफा दुकानदार ग्राहक को चिट पर रसीद देते हैं। न उस पर टैन नंबर होता है, न दुकान का नाम-पता। ऐसा करके वे वाणिज्य व आयकर चोरी तो करते ही हैं, साथ ही ग्राहक के प्रति वैधानिक जिम्मेदारी से भी बचने का रास्ता निकालते हैं। ऐसे में ठगी का शिकार होने पर दुकानदार को कोर्ट में नहीं घसीटा जा सकता। जेवरों में सोना-चांदी की कम मात्रा को लेकर कंप्लेन करने में भी दिक्कतें आती हैं।