अयोध्या में नया बस अड्डे पर फिर फंसा पेंच
अयोध्या। मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल अयोध्या के पर्यटन विकास के कार्यों बार-बार रोड़ा लग रहा है। अयोध्या में नए बस अड्डे के निर्माण में जमीन का मामला संस्कृति विभाग से परिवहन विभाग को स्थानांतरित होने के बाद अब किसान लामबंद हो गए हैं। कार्यदाई संस्था राजकीय निर्माण निगम जब जमीन पर बाउंड्रीवाल बनाने पहुंची तो, स्थानीय किसानों ने काम रोक दिया। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी जमीन का अधिग्रहण कर उन्हें पैसा नहीं दिया जाएगा, तब तक काम नहीं करने देंगे। इसके चलते बस स्टेशन के निर्माण में पेंच फंस गया है।
विगत दिनों कैबिनेट की बैठक में सरकार द्वारा नए बस अड्डे के निर्माण के लिए भूमि की व्यवस्था व 6.50 करोड़ रुपये की मंजूरी के बाद निर्माण की कवायद तेजी से शुरू हुई थी। अयोध्या के बाईपास से सटे जमीन पर अयोध्या का नया बस स्टेशन बनना है। कार्यदाई संस्था यूपी राजकीय निर्माण निगम ने बस अड्डे के निर्माण के लिए जमीन मांगी थी। बाईपास स्थित संस्कृति विभाग की जमीन बस अड्डे के लिए चिह्नित की गई। अब कुल चार एकड़ जमीन पर नया बस स्टेशन बनना है। कार्यदाई संस्था जब जमीन की बाउंड्रीवाल कराने पहुंची तो, किसानों ने काम करने से रोक दिया। किसानों का कहना है कि पहले हमारी जमीन का पैसा मिले, फिर काम करने देंगे। जिसके बाद काम रुक गया।
कार्यदाई संस्था यूपी राजकीय निर्माण निगम के परियोजना प्रबंधक सुधीर तायल ने बताया कि बस अड्डे के काम में किसानों ने रोड़ा डाल दिया है। 85 प्रतिशत किसानों की जमीन अधिग्रहीत की जा चुकी है, केवल 15 प्रतिशत किसानों की जमीन अधिग्रहण कर उन्हें पैसा दिया जाना है। शीघ्र ही बस स्टेशन निर्माण में अड़ंगा समाप्त हो जाएगा। बताया कि नया बस स्टेशन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। बस स्टेशन में एक साथ 40 गाड़ियां खड़ी हो सकेंगी। बस स्टेशन परिसर में रेस्टोरेंट, विश्रामालय, सुलभ शौचालय व यात्रियों के लिए पेयजल की सुविधा विशेष रूप से की जाएगी। अयोध्या आने वाले तीर्थयात्रियों की बसें व यात्री बसों के लिए अलग-अलग विंडो बनाया जाएगा।
प्राचीनता के पत्थर लगाने पर भी रोड़ा
रामपैड़ी से लेकर मुख्य मार्ग तक कोवल पत्थर लगाए जाने हैं। हनुमानगढ़ी जाने वाले मार्ग, कनकभवन व दशरथमहल जाने वाले मार्ग पर कोवल ब्लाक लगने हैं। ये केवल ब्लॉक शहर की प्राचीनता के गवाह बनेंगे। इसको लेकर भी अड़ंगा लगा हुआ है। सुधीर तायल ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास पर लगे प्राचीनता के पत्थर को चयनित किया गया था। इसी का मॉडल यहां बनाकर दिखाया गया है। जिसे अभी तक अधिकारियों ने मंजूरी नहीं दी है। मंजूरी नहीं मिलने के कारण पत्थर लगाने का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है। बताया कि रामकथा पार्क में एक करोड़ का काम होना था जो पूरा हो चुका है।
कुछ काम अधूरे, तो कुछ की ड्राईंग ही नहीं
कार्यदाई संस्था ने विकास कार्यों के लिए अभिलाषा इंटर प्राइजेज को टेंडर किया गया है। संस्था द्वारा 57 करोड़ के काम किए जा रहे हैं। जिनमें से कुछ में तो काम चल रहे हैं, जबकि कुछ मानचित्र व अनुमति न मिलने के कारण अभी तक शुरू नहीं हो सके हैं। ऐसे में दीपोत्सव से पूर्व कार्यों को पूर्ण करना मुश्किल ही लग रहा है। दिगंबर अखाड़ा में पौने तीन करोड़ से बहुउद्देशीय हाल का निर्माण कार्य पचास प्रतिशत पूर्ण किया जा चुका है। जबकि राम की पैड़ी में भी काम तेजी से चल रहा है, यहां हो रहे कार्यों की गुणवत्ता से सभी संतुष्ट हैं। लेकिन यहां भी अभी तक रेलिंग निर्माण के लिए स्वीकृति नहीं मिली है। लैंड स्केप के कार्य के लिए भी अभी तक मानचित्र उपलब्ध नहीं कराया गया है। 2.75 करोड़ से बनने वाले मल्टीलेबल पार्किंग के लिए भी अभी तक स्थल का ही चयन नहीं किया गया है। पूरी अयोध्या में 33 लाख से साईनेज लगने हैं जिसका अभी तक कार्यदाई संस्था को मानचित्र ही नहीं मिला है।