भगवान को भी वर्ग विशेष में बांटने का हो रहा प्रयास : गहलोत
अयोध्या। समता, समरसता, जीओ और जीने दी की हमारी सोच रही है। सर्वे भवन्तु सुखिन: ...का भाव आचरण में लागू करना होगा। आज भगवान को भी वर्ग विशेष में बांटने का प्रयास हो रहा है।
सबकी अलग-अलग जयंती मनाने, आयोजन करने की परंपरा चल निकली है। हमारे 33 करोड़ देवता हैं। उनके दर्शन, जयंती मनाने व आयोजन का सबको समान अवसर व अधिकार मिलना चाहिए।
समरसता का वातावरण बनाने के लिए जनभागीदारी की जरूरत है, इसके लिए सहभागी बनना होगा। यह बातें रविवार को केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहीं।
वे डॉ.राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के नवीन परिसर में संचालित दो दिवसीय समरसता कुंभ के समापन सत्र की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि धर्म, संस्कृति, देश सर्वोपरि है।
यह आवरण मन मस्तिष्क में आने के बजाए मैं और मेरा परिवार का भाव आने लगता है, तो विकृतियां आनी ही हैं। विकृतियों के कारण देश में धर्मांतरण को बढ़ावा मिला है। कुछ लोग यह भी कहते हैं कि समरसता की क्या जरूरत है, समता आना चाहिए।
इस पर भी लोग विवाद करते हैं। मेरा मानना है कि समता के बजाय समरसता आवश्यक है। समता के साथ सामाजिक बंधुत्व, अपनत्व आ जाए तो समरसता आएगी। समरसता आएगी तो विकृतियां दूर होंगी।
एकात्म मानववाद, समता व समरसता सबसे बड़ी पूंजी है। कहा कि देश सर्वोपरि है, धर्म, संस्कृति सर्वोपरि है। उसके लिए सब कुछ न्यौछावर करने की प्रेरणा लेकर जाएंगे तो समरसता कुंभ की सार्थकता होगी।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ इशारा करते हुए कहा कि अभी हाल ही में किसी ने हनुमान जी के बारे में कुछ कहा है, जो कि चर्चा का विषय बना हुआ है। मुझे इतना ही कहना है कि हनुमान जी सच्चे रामभक्त थे।
दुनिया में पूज्यनीय हैं। इससे ज्यादा उनके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। मंत्री गहलोत ने कहा कि भीमराव आंबेडकर ने जो संविधान बनाया, उसमें सभी बातों का समावेश है।
आज आंबेडकर को भी लेकर दो वर्ग हो गए हैं। एक वर्ग कहता है कि वह हमारे हितैषी थे, दूसरा कहता है कि विरोधी थे। सही मायने में आंबेडकर की सोच को सही दिशा में अंगीकार करने की जरूरत है।
उन्होंने विषमताओं को दूर करने के लिए संघर्ष किया। लोगों को न्याय दिलाने के लिए कई बार अपमानित हुए। वे सच्चे देशभक्त, धर्मप्रेमी थे। संविधान के प्रावधान का सही अर्थों में अनुपालन हो तो समता व समरसता आएगी।
समरसता कुंभ के समापन सत्र में सामाजिक समरसता के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए नौ लोगों को सम्मानित भी किया गया। राधारमण महाराज, सुनील जी, बाबा राम रेखा, कमलेश भाई, भारत भूषण, अनुराधा जी, निर्मला, उमेश बालयोगी व शिवाजी राव को दीपोत्सव का स्मृति चिह्न व रामनामी भेंटकर केंद्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत, संघ के सह सर कार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल व अवध विवि के कुलपति मनोज दीक्षित द्वारा सम्मान किया गया।