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ह्रदय रोग के इलाज के नाम पर सिर्फ ईसीजी की सुविधा

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हृदय रोग के इलाज के नाम पर सिर्फ ईसीजी की सुविधा
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फैजाबाद। बेहिसाब दिनचर्या, बदलता खानपान, रहन-सहन के तौर-तरीकों में तेजी से हो रहा परिवर्तन के साथ ही भागदौड़ भरी जीवनशैली से उपजा तनाव आदि के कारण जिले में भी दिल के रोग को तेजी से बढ़ रहे हैं।

बुजुर्गों के साथ-साथ नौजवानों में भी यह रोग तेजी से प्रवेश कर रहा है। हृदय रोगियों की संख्या में तो नित्य इजाफा हो रहा है। लेकिन जिले में इसका इलाज न के बराबर है। सिर्फ प्रमुख अस्पतालों में ईसीजी भर की सुविधा उपलब्ध है।
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साथ ही डॉक्टरों की भी भारी कमी है। जिससे यहां सिर्फ प्राथमिक उपचार देकर मरीजों को रेफर करना मजबूरी है। आज (शनिवार) को विश्व हृदय दिवस है। बढ़ते हृदय रोगियों के कारणों के संबंध में शुक्रवार को अमर उजाला की टीम ने विशेषज्ञों से जानकारी ली।

उनके अनुसार इसकी मुख्य वजह खान-पान व रहन-सहन में व्यापक स्तर पर की जा रही लापरवाही प्रमुख है। उनका कहना है कि वर्तमान परिवेश में तेजी से बदल रहे लाइफ स्टाइल के कारण हार्ट डिजीज से होने वाली मौतों की तादाद भी बढ़ रही है।

पहले अधिकांश हृदय रोगी 60 वर्ष से अधिक उम्र के होते थे। अब युवावस्था में ही लोग इस रोग की चपेट में आ रहे हैं। वहीं संसाधनों की बात करें तो जिला अस्पताल में इलाज के लिए आठ बेड का आईसीसीयू बना है।

लेकिन संसाधन के नाम पर सिर्फ ईसीजी मशीन व मॉनीटर स्थापित है। ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम तो स्थापित होने के बाद से करीब छह वर्षों से खराब पड़ा है। ऊपर से यहां विशेषज्ञ चिकित्सक भी नहीं हैं।

इसी तरह राजकीय श्रीराम चिकित्सालय में हृदय रोग विशेषज्ञ के कंधों पर सीएमएस की जिम्मेदारी है। जबकि संयुक्त मंडलीय चिकित्सालय में एक भी डॉक्टर तैनात नहीं हैं।

इन सभी अस्पतालों में सिर्फ ईसीजी की सुविधा है और इको-2डी व पीएमटी आदि जांचों के लिए मरीजों को बाहर ही जाना पड़ता है। इस तरह चिकित्सक, संसाधन आदि के अभाव में जिले में हृदय रोग का बेहतर इलाज संभव नहीं है।

वहीं नागरिक कुढ़ा केशवपुर के सुधीर चंद्र पांडेय ने बताया कि शुरू से मन में यह भ्रम था कि हम पूरी तरह फिट हैं। काम कुछ ऐसा था कि परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में स्वयं के खानपान और रहन-सहन पर ध्यान न दे सके।

नतीजा रहा कि 32 वर्ष की उम्र में ही हृदय रोग की चपेट में आए तो एसजीपीजीआई तक जाना पड़ा। अब कुछ सुधार होने पर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की सलाह देते हैं।

रीडगंज की सावित्री ने बताया कि शुरू से ही दिल के रोग को लेकर सचेत रहती थी। लेकिन मानसिक तनाव व कुछ अनियमिता की वजह से इसकी चपेट में 62 वर्ष की उम्र में आई।

तभी से परहेज व सावधानी से जीवनयापन कर रही हूं। इसके अलावा परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी इसके प्रति जागरूक करती चली आ रही हूं।

हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल कुमार का कहना है कि खानपान में परहेज करें, सदा क्रियाशील रहें। समय से इलाज कराएं। डॉक्टर द्वारा दी गई सलाह का पालन करें।

फास्ट फूड के सेवन, सोफा शैली, चौबीस घंटे बिस्तर, बेडरूम में लगा टीवी आदि युवाओं में इस रोग के बढ़ने के मुख्य कारण हैं। इस रोग से जागरूकता के लिए अभियान भी चलाने की आवश्यकता है।

जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. रामकिशोर का कहना है कि छाती में समय-समय पर दर्द होना, सांस लेने में तकलीफ महसूस होना, थोड़ा चलने पर घबराहट महसूस होना, लगातार तनाव का बने रहना आदि हृदय रोग के प्रमुख लक्षण हैं।
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इनसे बचाव के लिए नियमित व्यायाम करें, योग करें, तनाव से दूर रहें, तला-भुना कम खाएं, भोजन में नमक का कम सेवन करें, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज पर कंट्रोल रखें, धूम्रपान न करें।
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