फफैजाबाद। जब तक तदर्थ शिक्षकों का विनियमितीकरण नहीं होगा तब तक सदन से सड़क तक आंदोलन जारी रहेगा। यह बातें शनिवार को शिक्षा भवन पर उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ द्वारा आयोजित धरने में विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहीं।
एमएलसी ने कहा कि एकजुट होकर अभियान चलाकर भ्रष्टाचारियों को भगाना पड़ेगा। कहा कि वित्तविहीन व्यवस्था को समाप्त कर अधिनियम की धारा 7(4) के अधीन मान्यता देकर लोकतंत्र को मजबूत करना सरकार की जिम्मेदारी है। पेंशन की पुरानी व्यवस्था को लागू करना होगा।
प्रांतीय उपाध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी ने कहा कि 1971 के जेल भरो आंदोलन में संघर्ष के बाद वेतन, पेंशन, जीपीएफ आदि मिला था लेकिन लड़ाई समाप्त होते ही विनियमितीकरण तक नहीं हो रहा है। प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश सिंह ने कहा कि जनपदीय अध्यक्ष व मंत्री को शिक्षक समस्याओं पर आर-पार की लड़ाई लड़नी चाहिए। अंबेडकरनगर के जिला मंत्री आशाराम वर्मा ने कहा कि अधियाचन निरस्त किया जाना आवश्यक है।
धरने में शिक्षक नेताओं ने पुरानी पेंशन योजना लागू करने, आमोलित विषय विशेषज्ञों की सेवाओं को जोड़कर समस्त लाभ देने, माध्यमिक विद्यालयों के व्यवसायिक शिक्षकों एवं कंप्यूटर अनुदेशकों को शिक्षक पद पर नियुक्त करने समेत नौ सूत्री मांगपत्र मुख्यमंत्री को प्रेषित किया। धरने में सुल्तानपुर के जिलाध्यक्ष दीपक कुमार सिंह, अरुण सिंह, सुशील कुमार सिंह, मंडलीय अध्यक्ष चंद्रेश्वर पांडेय, प्रांतीय कार्य समिति के सदस्य धीरेंद्र प्रताप सिंह, इंद्रपाल सिंह समेत अन्य मौजूद रहे।