‘बाबू कुछ मत पूछ, दो चार लइकन के बदमाशी से हो गइल एतना बड़ हादसा..’ ये कहना है अमिरिका यादव, लालचंद और साधू का। कुड़वां दिलीपनगर के अमिरिका और राजपुर दूबर के लालचंद और साधू इलाहाबाद जंक्शन की घटना को याद करके सिहर उठते हैं।
वे कहते हैं, 'स्टेशन के पुल पर भीड़ बहुत रहे, हमनियों के पुल पर चढहीं जात रहनी जा कि हल्ला होखे लागल। देखनी जा त चार बड़हन लइकन एगो लइकी और लइका से झगड़ा करत रहले स। पूछला पर पता चलल कि भाई बहिन कहीं जाए खातिर ट्रेन पकड़े आईल रहले।'
'पुल से प्लेटफार्म नंबर चार पर जात रहले कि चार गो लइकन लइकिया के संगे छेड़खानी कइले स। मना कइला पर झगड़ा हो गइल। झगड़ा देख के आपीएफ के जवान लाठी भांजे लगले और भगदड़ मच गइल। एही ही चलते कुल भइल। ओकरा आगे के मत कहवाव बाबू।' ये कहते हुए उन बुजुर्गों की आंखें भर आई थीं। आवाज भर्रा गई थी।
ये कहना है उन प्रत्क्षदर्शियों का जो घटना के वक्त इलाहाबाद जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर चार से छह पर जाने के लिए फुट ओवरब्रिज पर चढ़ने जा रहे थे। इलाहाबाद जंक्शन पर हादसे के बाद ये लोग इलाहाबाद सिटी स्टेशन पहुंचे और वहां से चौरीचौरा एक्सप्रेस से सोमवार की दोपहर गोरखपुर पहुंचे।
यहां इस संवाददाता ने उनसे रविवार की घटना के बारे में जानना चाहा तो उन्होंने छूटते ही कहा कि लड़की संग छेड़छाड़ के चलते एतना बड़ हादसा भइल। उन्होंने बताया कि पहले आरपीएफ ने लाठी भांजी तो भगदड़ हुई फिर स्थिति बेकाबू होते देख आरपीएफ ने पीएसी को बुलाया।
पीएसी ने भी लाठियां भांजीं। इसी भगदड़ में लोग एक दूसरे पर गिरते गए। अब उसमें कितने लोग मरे और कितने घायल हुए हम लोग नहीं जानते। कारण आरपीएफ के जवानों ने घटना के बाद स्टेशन खाली कराना शुरू किया तो हम लोग सिटी स्टेशन आ गए और वहीं से चौरीचौरा एक्सप्रेस पकड़ कर यहां आए हैं।