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पुआल के सहारे गोशाला में पेट भर रहे गोवंश

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निवाड़ीकला। गोशाला में प्रति गोवंश 30 रुपये की धनराशि आवंटित की जाती है, जिसमें भूसा और हरा चारा भी दिए जाने का प्राविधान है। ब्लॉक क्षेत्र की अधिकतर गोशालाओं में गोवंश धान के पुआल के सहारे ही जीवित है।
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हरा चारा तो दूर, उन्हें भूसा भी मिलना दुर्लभ है। भरपेट भोजन न मिलने से गोवंश कमजोर होकर मौत के शिकार भी हो रहे हैं। किसान रामवीर, पंकज कुमार, अवधेश, श्यामू, वंश बहादुर ने बताया कि गोशालाओं को शुरू करते समय ऐसा लगा था कि अब गोवंश और किसान दोनों की दशा सुधर जाएगी।
गोशालाओं में गोवंश रखे गए हैं, लेकिन उनके खाने तक के प्रबंध नहीं हैं। गोवंश पुआल खाकर जिंदा रहने की कोशिश कर रहे हैं। शासन प्रशासन बड़े-बड़े दावे तो करता है, लेकिन धरातल पर कुछ भी उतरता नहीं दिखाई देता।
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अमर उजाला की पड़ताल में भरईपुर गोशाला के गोवंश पुआल खाते हुए नजर आए। यही हाल ब्लॉक की कई गोशालाओं का है। पर्याप्त मात्रा में भोजन न मिलने से गोवंश लगातार कमजोर हो रहे हैं।
इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। वहीं, दूसरी ओर बारिश के दिनों में गोशालाओं में जलभराव के कारण कीचड़ हो जाता है, जिससे कमजोर गोवंश उसी में गिरकर जान से हाथ धो बैठते है।
कई गोशालाओं में सर्दी से बचाने के लिए सिर्फ नाममात्र का तिरपाल लगा हुआ है। सफाई की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण गोशालाएं गंदगी से पटी पड़ी है। इससे साफ जाहिर होता है कि प्रशासनिक अमला गोशालाओं के लिए कतई संजीदा नहीं है।
उधर, बीडीओ महेवा निरंजन त्रिवेदी ने बताया कि गोशालाओं में गोवंश को चारा खिलाने के मानक तय हुए है। उसी के अनुरूप चारा खिलाया जाएगा। गोवंश को पुआल नहीं खिलाया जाएगा। जिस जगह ऐसा होगा, उन संचालकों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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