खितौरा धाम में आयोजित होली सत्संग मेला में अध्यात्म की गंगा बही। बाबा जय गुरुदेव की जन्मभूमि पर हुए इस आयोजन में दूर-दूर से आए उनके अनुयायियों ने जन्मभूमि की पवित्र रज का तिलक लगाया और अपनी भूलचूक की माफी मांगी। इस दौरान खितौरा धाम के निकटवर्ती क्षेत्रों में श्रद्धालुओं के ऊपर हेलीकाप्टर से पुष्प वर्षा की गई। सत्संग के दौरान पंकज जी महाराज ने कहा कि चाहे जो मजहब हो सभी के रास्ते एक है। केवल लफ्जों का फर्क है।
पंकज जी महाराज ने कहा कि यह मनुष्य शरीर हरि मंदिर है। इसी में उसको प्राप्त किया जा सकता है। यह दुनिया एक बहुत बड़ा रंगमंच है, सब लोग अपनी-अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जन्म मरण के बंधन से मुक्त होने के लिए हमें शब्द (आवाज) पर सवार होना पड़ेगा। शब्द ही जीवात्माओं का गुरु है, इसका अभ्यास करते रहना चाहिए। अलग-अलग मजहबों में इसके लिए अलग अलग लफ्जों का प्रयोग किया गया है।
संत महात्माओं ने इसे नाम कहा है, मुसलमान इसे कलामे इलाही, चीन के महात्माओं ने ताओ, ईसा मसीह ने वर्ड कहा है। चाहे जो मजहब हो सभी के रास्ते एक है। केवल लफ्जों का फर्क है। इस दौरान चरन सिंह एडवोकेट, डॉ. रामकृष्ण यादव, प्रधान खितौरा सुनील यादव, मनु भाई डी पटेल संस्था उपाध्यक्ष, डा. केके मिश्रा राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, बाबूराम यादव, राजेंद्र भसीन, वीरेंद्र सिंह एडवोकेट, हरीओम ब्लाक प्रमुख भरथना, डॉ. रामयश सिंह यादव, पप्पू यादव, संतराम चौधरी, महेंद्र चौधरी, अनीता दिवाकर, शिवराज सिंह, रक्षपाल सिंह, श्रीकृष्ण यादव आदि मौजूद रहे।
खितौरा में सत्संग स्थल पर जब हेलीकाप्टर से पुष्प वर्षा हुई तो श्रद्धालुओं की आस्था और उमड़ पड़ी। यह पुष्पवर्षा उनके लिए आकर्षण का केंद्र रही।