जसवंतनगर (इटावा)। श्री इंद्र ध्वज महामंडल विधान में बुधवार को वरिष्ठ विद्वान लेखक एवं बाल ब्रह्मचारी रवींद्र ‘आत्मन’ ने स्वाध्यात किया। उन्होंने कहा कि संसार की सभी वस्तुओं का स्वयं परिणामन हो रहा है। हम किसी भी चीज के कर्ताधर्ता नहीं हैं। हमें कार्य पूर्ण करने का अहंकार नहीं करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान तत्व चर्चा को नृत्य नाटिका के रूप में प्रस्तुत किया गया।
रवींद्र जी ने कहा कि तत्वज्ञान को समझते हुए अपना एवं दूसरों का कल्याण करना चाहिए। ग्रंथ राज समय सार का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस प्रकार अहंकार से भरे हुए कुम्हार को भी रेत से घड़ा बनाने का भाव नहीं आता, उसी प्रकार हमें भी अपने अहंकार को त्याग करके संयम के मार्ग में लगना चाहिए। पंडित जी के इस स्वाध्यात को सुनने सिरसागंज, करहल, फिरोजाबाद, भिंड, इटावा से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।
रात में तीर्थंकर माता की तत्त्वज्ञान प्रश्नोत्तर की प्रस्तुति हुई। विधानाचार्य पंडित संजय शास्त्री ने इस पर प्रकाश डालते हुए बताया तीर्थंकर की माता को जब 16 सपने आते हैं, तो उन्हें जिज्ञासा होती है। जिसका समाधान वह राजा से ही करती हैं। देवियों को जो शंका होती है, उसका समाधान वह तत्व चर्चा के द्वारा स्वयं करती हैं।
तालियों की गड़गड़ाहट एवं गगनभेदी नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में मोनिका जैन, अर्चना जैन, वंशिका जैन, आयुषी जैन, अंजना जैन, नीतू जैन, रुचि जैन आदि का सहयोग रहा।