बकेवर। गर्भवती महिला के भ्रूण लिंग का परीक्षण कराना एक गंभीर अपराध है जिसके लिए कठोर सजा का प्रावधान है। यह जानकारी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्राविधिक स्वयंसेवक एवं अधिकार मित्र अश्विनी त्रिपाठी ने ब्लॉक सभागार महेवा में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए दी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
कानूनी प्रावधान और दंड श्री त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि यदि कोई अल्ट्रासाउंड सेंटर या चिकित्सक भ्रूण लिंग का परीक्षण करते पाया जाता है, तो उसका लाइसेंस निरस्त किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, तीन साल की कठोर सजा के साथ 50,000 रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया जा सकता है। उन्होंने इस कृत्य के सामाजिक दुष्परिणामों पर भी प्रकाश डाला। सामाजिक असंतुलन और अपराध वृद्धि का खतरा श्री त्रिपाठी ने चेतावनी दी कि यदि भ्रूण लिंग की जांच कर कन्या होने की दशा में भ्रूण की हत्या की जाती है तो इससे महिला और पुरुषों के बीच असमानता पैदा होगी।
इसके परिणामस्वरूप समाज में कई पुरुष अविवाहित रह जाएंगे जिससे अपराधों में बढ़ोतरी होने की आशंका है। उन्होंने महिलाओं के संरक्षण हेतु उनके अधिकारों की जानकारी दी और किसी भी प्रकार की समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क करने का सुझाव दिया। इस अवसर पर दर्जनों महिलाएं उपस्थित रहीं।