इटावा। जसवंतनगर पुलिस की ओर से फर्जी सिम और खाते एक्टिवेट करने वाले गिरोह को पकड़ने के बाद अब पुलिस जिले में सिम का कारोबार करने वालों पर कड़ी नजर रख रही है। जिले में प्रतिदिन लगभग 300 सिम एक्टिवेट होते हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में ऐसे सिम हैं जो अंगूठा लगाने वाले को दिया ही नहीं जाता है। इन सिमों को बाद में धोखाधड़ी सहित अन्य गलत कामों में इस्तेमाल करने वाले लोगों को महंगे दामों पर बेच दिया जाता है।
फर्जी आईडी वाले सिम का बड़ा रैकेट जिले में चल रहा है, जो अब सीधे तौर पर साइबर ठगों के नेटवर्क से जुड़ गया है। दैनिक आधार पर लगभग तीन सौ सिमों को अवैध तरीके से सक्रिय कर गलत हाथों में बेचा जा रहा है। यह धंधा शहर में स्थापित लगभग 70 केएनओपी केंद्रों के माध्यम से संचालित हो रहा है। भोले-भाले ग्राहकों को मुफ्त सिम का लालच देकर उनसे दो से तीन बार अंगूठा लगवाकर अतिरिक्त सिम एक्टिवेट कर लिया जाता है। जिनका उपयोग फिर आपराधिक गतिविधियों में होता है।
एक कंपनी के प्रतिनिधि ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जिले में प्रतिदिन सक्रिय होने वाली तीन सौ सिमों में से लगभग 80 प्रतिशत केएनओपी केंद्रों से खरीदे जाते हैं, जबकि शेष 20 प्रतिशत सिम दुकानों से आते हैं। इन सिमों को सक्रिय करने के बाद, विक्रेता इन्हें तीन सौ रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक के दामों में बेच देते हैं। ग्राहकों की सहमति के बिना उनकी पहचान का उपयोग करके सिम एक्टिवेट किया जाता है। एसपी सिटी अभयनाथ त्रिपाठी ने बताया कि ऐसे लोगों की निगरानी की जा रही है जो फर्जी दस्तावेजों से सिम निकलवाकर बेच रहे हैं, और इनका सत्यापन भी कराया जाएगा।
सिम सक्रिय करने के बाद, विक्रेता इन्हें लगभग तीन महीने तक अपने पास रखते हैं। इसके बाद, ये सिम बिना किसी नए प्रपत्र या सत्यापन के आसानी से किसी अन्य मोबाइल कंपनी में पोर्ट हो जाती हैं। इस सुविधा का लाभ उठाकर, विक्रेता इन पोर्टेड सिमों को फिर से ऊंचे दामों पर दूसरे लोगों को बेच देते हैं। यहीं पर इन सिमों का सीधा संबंध साइबर ठगों के नेटवर्क से जुड़ जाता है।