धोखाधड़ी में माहिर जालसाज मनीष से बरामद सिंडीकेट बैंक के लगभग साढ़े दस करोड़ रुपये के दोनों डिमांड ड्राफ्ट (डीडी) भी फर्जी पाए गए हैं।
इन्हें कंप्यूटर प्रिंटर के जरिये क्लोनिंग से तैयार किया गया था। इससे कि भारी भरकम रकम के यह डीडी दिखाकर सामने वाले पर प्रभाव छोड़ा जा सके। यह जालसाज फिलहाल बैंक की नजर में भगोड़ा है। विभागीय जांच भी जारी है।
फर्जी सीबीआई और पुलिस अधिकारी बनकर ठगी करने वाले गैंग का सरगना मनीष अपने साथियों के साथ जेल जा चुका है।
उसके कारनामे खुल रहे हैं। पुलिस ने शुक्रवार को उसे गिरफ्तार किया तो उससे फर्जीवाड़े की चीजों में सिंडीकेट बैंक के साढ़े 9 करोड़ और 96 लाख 90 हजार 715 रुपये के दो डिमांड ड्राफ्ट भी बरामद हुए थे। पुलिस ने दोनों डीडी सिंडीकेट बैंक में जांच के लिए भेजे थे। यह फर्जी मिले हैं।
नगर स्थित सिंडीकेट बैंक शाखा के मैनेजर ज्ञानेश कुमार ने बताया कि जालसाज मनीष के साथ उन्होंने काम नहीं किया। अन्यथा कई अन्य भी शक के दायरे में होते। हालांकि उसके बैंक से जुड़ाव की वजह से चर्चा तो रहेगी।
उन्होंने बताया कि दोनों डिमांड ड्राफ्ट फर्जी पाए गए हैं। मनीष कंप्यूटर इंजीनियर है। उसने प्रिंटर के जरिए क्लोनिंग कर इन्हें तैयार किया होगा। हो सकता है कि उसने यह डीडी अपने रसूख को दर्शाने के लिए तैयार किए हों। अगर इन डीडी को वह बैंक में लगाता तो पकड़ा जाता।
उन्होंने बताया कि ग्वालियर में बैंक लोन को लेकर मनीष पर धोखाधड़ी करने का आरोप है। इसके बाद बैंक ने उसका डिमोशन कर दिया था। अक्तूबर 2018 से उसने ऑफिस ज्वाइन नहीं किया है।
लिहाजा वह बैंक की नजर में फिलहाल भगोड़ा है। उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर विजिलेंस जांच जारी है।