मुख्यमंत्री के जिले में बर्बाद फसल के सदमे से तीन और किसानों की मौत हो गई। इन पर लाखों रुपये का कर्ज भी था। प्रशासनिक अधिकारी किसानों की मौत को फसल की बर्बादी से जोड़कर देखने को तैयार नहीं हैं। किसानों की मौत से उनके परिवारों में कोहराम मचा है। कोहराम इस बात को लेकर भी है कि परिवार अब लाखों रुपये के कर्ज को अदा कैसे करेगा, क्योंकि प्रशासन के रवैये से परिजनों को सरकारी मदद की भी उम्मीद नहीं है।
पहली घटना भरथना थाना क्षेत्र के गांव नगला घासी में हुई। यहां के राजेश यादव (45) पुत्र नेत्रपाल सिंह ने अपने 15 बीघा खेतों में गेहूं की फसल बोई थी, जो बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से चौपट हो गई। सोमवार की सुबह वह अपने बेटे राहुल व शीलू के साथ गेहूं की कटाई करने खेत पर पहुंचा।
उसने गेहूं की बालियां देखीं तो उनमें दाना काफी पतला था। बर्बाद फसल देखकर वह अचेत होकर खेत पर ही गिर पड़ा। उसके बेटों ने आवाज देकर अपने परिवार के लोगों को बुलाया। परिजन मौके पर पहुंचे और खेत में अचेत पड़े राजेश को जिला अस्पताल ले गए। यहां डाक्टरों ने राजेश को मृत घोषित कर दिया।
मृतक के भाई राजीव यादव ने बताया कि राजेश ने 10 महीने पहले बेटी की शादी की थी। शादी के लिए उसने पांच-छह लाख रुपये का कर्जा लिया था। कर्ज में दबे राजेश की बर्बाद फसल देखकर सदमे से मौत हो गई। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
दूसरी घटना बकेवर थाना क्षेत्र के गांव नगला बसी में हुई। यहां नाथूराम (50) पुत्र रामस्वरूप ने 40 बीघा जमीन उगाई पर ली थी। इसके लिए उसने अपने परिचितों से करीब सवा लाख रुपये कर्जा भी लिया था। उसने खेतों में गेहूं की फसल बोई थी।
रविवार की रात उसने गेहूं की थ्रेसिंग कराई, लेकिन पैदावार उम्मीद से काफी कम निकली। इसका सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर सका और खेत में ही बेहोश होकर गिर पड़ा। परिजन उसे इलाज के लिए ले जाते, उससे पहले ही उसने दम तोड़ दिया।
मृतक के पुत्र अनिल ने बताया कि फसल बर्बाद हो गई थी। कर्जा कहां से चुकाते, इसी सदमे से पिता की मौत हो गई। इन दोनों की घटनाओं की जांच करने वाले तहसीलदार भरथना सुभाषचंद्र यादव ने बताया कि नगला बसी निवासी नाथूराम दिल का मरीज था। उसकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। वहीं नगला घासी में राजेश यादव के शव का पोस्टमार्टम कराया गया है। पीएम रिपोर्ट आने पर मौत का कारण साफ हो सकेगा।
तीसरी घटना जसवंतनगर थाना क्षेत्र के गांव प्रतापपुरा की है। यहां के जयदेव (36) पुत्र बलवंत सिंह की रविवार की रात सदमे से मौत हो गई। पत्नी गिरजा देवी ने बताया कि पति जयदेव ने खेतों में आलू की फसल बोई थी। फसल बोने तथा डीसीएम खरीदने के लिए उन्होंने कर्जा लिया था।
उम्मीद थी कि पैदावार अच्छी होने पर वह कर्जा चुकता कर देंगे, लेकिन फसल बर्बाद हो गई और कर्जा भी अदा नहीं हो पाया। इसी से परेशान होकर उन्हें रविवार की रात तीन बजे दिल का दौरा पड़ा। इलाज के लिए सैफई रिम्स ले गए।
यहां डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। एसडीएम हंसराज यादव ने बताया कि क्षेत्रीय लेखपाल को जांच के लिए भेजा गया है। परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष तथा राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत मदद दिलाई जाएगी। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से मची तबाही के बाद जिले में अब तक करीब 27 किसानों की मौत हो चुकी है।