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युवक का शव गांव आते ही मचा कोहराम

Tue, 09 Jun 2015 11:02 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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गोरखपुर में निषाद आरक्षण आंदोलन के दौरान मारे गए युवक का शव मंगलवार को उसके पैतृक गांव मड़ैया दिलीप नगर पहुंचा। शव पहुंचते ही गांव में कोहराम मच गया।
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निषाद समाज से जुड़े आसपास के जिलों के लोगों का तांता लग गया। परिजनों की चीख-पुकार सुन हर किसी की आंखें नम हो गईं। बवाल की आशंका को देखते हुए गांव में सुरक्षा के कडे़ इंतजाम रहे। काफी रस्साकसी के बाद देर शाम शव का अंतिम संस्कार किया जा सका।

गोरखपुर के सहजनवां में निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग को लेकर चले आंदोलन में गोली लगने से मड़ैया दिलीपनगर निवासी अखिलेश निषाद (20) पुत्र आत्माराम निषाद की मौत हो गई थी। मंगलवार की सुबह 11 बजे मृतक का शव उसके पैतृक गांव पहुंचा।
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घर में जगह कम होने एवं भीड़ अधिक होने के कारण शव को गांव के स्कूल परिसर में रखा गया। शव देखकर विलख रहे परिवारीजनों का आरोप था कि उनके बेटे की पुलिस ने हत्या की है। परिवारीजनों ने बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिए और शव की रिसीविंग दिखाएबिना अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया।

इस पर पुलिस ने तत्काल पूरे मामले की जानकारी एसएसपी मंजिल सैनी को दी। जानकारी होने पर एसएसपी ने गोरखपुर के एसएसपी को स्थिति से अवगत कराते हुए पोस्टमार्टम रिपोर्ट मेल पर मंगाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट सौंपने के बाद परिवारीजन अंतिम संस्कार को राजी हुए।

मंगलवार की शाम सात बजे शव का अंतिम संस्कार किया गया। वहीं परिवारीजनों के साथ मौके पर मौजूद निषाद समाज के लोगों ने आरोपी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग प्रदेश सरकार से की है।

पुलिस की गोली से हुई मौत
गोरखपुर हिंसा में युवक की मौत को लेकर अफसर चाहे कुछ कहे, लेकिन परिजन चीख-चीख कर कह रहे थे कि युवक की मौत पुलिस की गोली से हुई है। हालांकि घर पर शव को खुलने नहीं दिया गया।

मृतक अखिलेश के साथ गोरखपुर आंदोलन में शामिल होने गए उसके पड़ोसी युवक पंकज ने परिवारीजनों को बताया कि  आंदोलनकारियों और प्रशासनिक व पुलिस अफसरों के बीत बातचीत चल रही थी।

इसी बीच कुछ लोगों ने हो हल्ला किया। पुलिस के जवानों ने हवाई फायरिंग करने की बजाय गोली सीधे आंदोलनकारियों की ओर चलाना शुरू कर दिया। इस दौरान गोली लगने से अखिलेश वहीं गिर पड़ा। उसे उठाने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक लाठी चार्ज हो गई। 

चप्पे-चप्पे पर तैनात रहा पुलिस फोर्स
गोरखपुर में हुई हिंसा में मारे गए युवक का शव गांव पहुंचने से पहले ही अफसरों ने अप्रिय वारदात से निपटने की तैयारी कर ली थी। गांव में चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स को तैनात किया गया था। मौके पर मौजूद अफसरों की पूरी कोशिश थी कि किसी भी तरह शव का अंतिम संस्कार कराया जाए। 

मंगलवार की सुबह गोरखपुर पुलिस जिले के अनंतराम बार्डर तक शव लेकर पहुंची। यहां पहले से मौजूद बकेवर थाना प्रभारी एके सिंह ने शव को अपनी सुरक्षा में ले लिया। इसके बाद गोरखपुर यहां से वापस रवाना हो गई। इलाकाई पुलिस शव को लेकर सीधे मृतक के गांव पहुंची।

सुरक्षा की दृष्टि से गांव में बकेवर, लवेदी, चकरनगर, भरेह थाना का पुलिस फोर्स, क्यूआरटी टीम व पीएसी को तैनात किया गया था। इसके साथ ही एसडीएम भरथना अशोक कुमार मौर्य, सीओ भरथना राघवेंद्र गौतम, सीओ चकरनगर रामकृपाल भारतीय मौजूद रहे। 

एफआईआर में नहीं था नाम
परिवारीजनों का कहना था कि अखिलेश की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है। इसी को लेकर परिवारीजनों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ एफआईआर की प्रति गांव मंगवाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण ईंट लगना एवं गोली लगना बताया गया। जबकि गोरखपुर में दर्ज हुई एफआईआर में मृतक का नाम नहीं था।

अखिलेश के पेट में लगी थी दो गोली
गोरखपुर। आरक्षण की मांग को लेकर रेलवे ट्रैक पर हुए बवाल के दौरान पुलिस फायरिंग में मारे गए इटावा के छात्र अखिलेश को दो गोली लगी थी। शव के पोस्टमार्टम में दो गोली लगने की पुष्टि हुई है। हालांकि शरीर में गोली नहीं मिली। माना जा रहा है कि गोली शरीर के पार निकल गई।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जंगल कौड़िया में तैनात डॉक्टर अनिल कुमार और खोराबार के शिवपुर सीएचसी के डॉक्टर मनोज ने सोमवार देर रात अखिलेश के शव का पोस्टमार्टम किया। पीएम रिपोर्ट से इतना तो साफ हो गया है कि अखिलेश की मौत गोली से ही हुई।

इस संबंध में एसएसपी प्रदीप कुमार कहना है कि अखिलेश निषाद की मौत गोली लगने से हुई है। पेट में दो गोली लगने के साथ ही पार हो जाने की बात पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई है। गोली किसने चलाई इसकी जांच चल रही है।
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