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आध्यात्मिक होली में उमड़ी भक्तों की भीड़

Sat, 07 Mar 2015 10:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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बाबा जयगुरुदेव की जन्मस्थली खितौरा में पंकज महाराज के सानिध्य में आध्यात्मिक होली खेली गई। हजारों की संख्या में उपस्थित शिष्यों के ऊपर हेलीकाप्टर से फूल बरसाए गए। पूरा क्षेत्र जयगुरुदेव के जयघोष से गूंज उठा। पंकज महाराज ने शिष्यों को आशीर्वाद देते हुए प्रवचन के माध्यम से उन्हें कई अहम सीख दीं।
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कहा कि सभी संतों महापुरुषों ने अपने-अपने समय में केवल मनुष्य जामा में परमात्मा को प्राप्त करने की बात कही। इस शरीर से बड़ा और पवित्र हरि मंदिर दुनियां में नहीं है। यह शरीर एक ऐसे सरोवर की भांति है जिसमें अपने ख्याल को इंद्रियों से हटाकर अंदर की ओर ले जाने पर मन और जीवात्मा पर चढ़े पाप-पुण्य रूपी कर्मों की गंदगी धुल जाती है। यह तीज त्यौहार केवल इस मकसद से मनाए जाते हैं कि परमात्मा से मिलने का अवसर प्राप्त हो सके।

उन्होंने कहा कि संत महापुरुष धरा पर कौम बनाने और मजहब चलाने के लिए नहीं आते हैं। सभी ने इस संसार को सुख-दुख की नगरी कहा है और यह पिछले जन्मों के पाप-पुण्यों के कारण दोनों बराबर आते रहते हैं। इस संसार में न कभी किसी को सुख मिला और न ही मिलेगा।
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होली का पर्व क्षमा याचना का पर्व है। गुरु महाराज गुनाहों को माफ  कर देंगे। इसके लिए सतगुरु पर भरोसा और विश्वास होना जरूरी है। बिना भरोसे और विश्वास के दुनियां में एक कदम चलना मुश्किल होता है।

इससे पहले प्रात:काल 5 बजे मंदिर में मृत्युंजय झा ने पंकज महाराज द्वारा पूजन कार्य संपन्न कराया। इस अवसर पर संस्था के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे। इसी दौरान मंदिर में पूजन व प्रसाद वितरण प्रारंभ हुआ। श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर में पूजन के लिए लगी रहीं।

सत्संग के दौरान हेलीकाप्टर में बैठकर मेला प्रभारी चरन सिंह, राजेंद्र भसीन, चंद्रमोहन सिंह ने सत्संग स्थल एवं निकट के ग्रामीण क्षेत्रों में पुष्प वर्षा की। आध्यात्मिक होली में देश के विभिन्न प्रांतों, जिलों से आई संगत, राजनीतिज्ञ, व्यावसायिक, प्रशासनिक एवं सामाजिक श्रद्धालु शामिल हुए।

कार्यक्रम में मनुभाई डी पटेल, डा. रामकृष्ण, विनय कुमार सिंह, डा. करुणा शंकर मिश्रा, संतराम चौधरी, मृत्युंजय झा, जीतू भाई, विजय पाल सिंह, डा. राजेंद्र कुमार, हृदयराम, डीडी शुक्ला, रामपाल गुप्ता, रवींद्र मौर्या, कृपाशंकर प्रधान, अखिल यादव, नीरज यादव आदि का सहयोग रहा।
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