इटावा। ड्रेस, किताबों के बिना कक्षा एक से पांच तक के बच्चे बुधवार विद्यालय पहुंचेंगे। जिले के 1775 विद्यालय 154 दिनों से बंद चल रहे थे। आधा सत्र बीतने के बाद अभी तक शिक्षा विभाग नौनिहालों को किताब व ड्रेस मुहैया नहीं करा पाया है। विद्यालयों में बच्चों के बीच सामाजिक दूरी बना पाना भी चुनौती होगी।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद से बंद चल रहे प्राइवेट और बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालय बुधवार से खोले जा रहे हैं। अभी तक शिक्षक ही विद्यालय आ रहे थे, लेकिन बच्चे नहीं बुलाए जा रहे थे। वहीं, अप्रैल से प्रारंभ हुए नये सत्र में बच्चों को अभी तक न तो किताबें मिली हैं और न ही ड्रेस।
किसान संगठन के जिलाध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में आमतौर पर गरीब किसानों के बच्चे पढ़ते हैं। जब तक सबको कोरोना की वैक्सीन नहीं लग जाती, तब तक दूसरे माध्यमों से ही पढ़ाई करना सही रहेगा।
राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ताखा के ब्लाक अध्यक्ष गौरव गुप्ता का कहना है कि कोरोना के लिए जरूरी एहतियात बरतते हुए बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षक तैयार हैं।
समाजसेवी जितेंद्र पाल सिंह का कहना है कि कोरोना महामारी की तीसरी लहर की बात कही जा रही है। ऐसे में स्कूल तभी खोले जाने चाहिए, जब बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो जाए। बिना टीकाकरण के स्कूलों में बच्चों को नहीं बुलाया जाना चाहिए था।