निवाड़ीकला। ग्रामीण क्षेत्र की मुख्य सड़कों व संपर्क मार्गों की मरम्मत कर गड्ढा मुक्त करने का सरकारी दावा पहली बारिश में ही बह गया। बरसात शुरू होते ही खस्ताहाल सड़कों पर जगह-जगह जलभराव और गंदगी होने लगी है। शासन-प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
ब्लॉक महेवा क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक संपर्क मार्ग बदहाल हैं। इन मार्गों से वाहनों की आवाजाही तो दूर पैदल निकलना भी दूभर है। बारिश में तो हाल बद से बदतर हैं। हालांकि सड़कों को गड्ढा मुक्त करने के उद्देश्य से लोकनिर्माण विभाग हर साल पैच वर्क कराया जाता है। हकीकत यह है कि ज्यादातर स्थानों पर मरम्मत का काम कागजों में ही सिमटकर रह जाता है। कई सड़कों पर घटिया निर्माण सामग्री डालकर इतिश्री कर ली जाती है। इसका खामियाजा भुगतते हैं ग्रामीण क्षेत्र के लोग। बुधवार को अमर उजाला ने ब्लॉक के कई संपर्क मार्गों की हकीकत जानी ......
अहेरीपुर गांव की सड़क कई वर्षों से बनी ही नहीं है। पांच वर्षों से अधिक समय हो गया न ही पैचवर्क किया गया और न ही डामरीकरण। अहेरीपुर में हनुमानगढ़ी से सड़क पर गड्ढों की शुरुआत हो जाती है। पीएचसी तक सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। ग्रामीणों का कहना है अहेरीपुर बाजार की रौनक खराब सड़क की वजह से चली गई है। पूरी सड़क पर जलभराव है। कई बार शासन से लेकर उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत भी की गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
लुधियानी मार्ग पर स्थित गांव भरईपुर और उरैंग में भी सड़क पर जलभराव है। सड़क से निकलते वक्त राहगीर अक्सर गिरकर चुटहिल हो जाते है। ग्रामीण कल्लू, ब्रजेश, रमेश कुमार का कहना है कि सड़क के किनारे की नालियों की सफाई न होने के कारण जलभराव हो जाता है। घरों, दुकानों के पानी सड़क पर भर जाता है। इससे अच्छी खासी सड़क बर्बाद हो गई। लोगों का कहना है कि अगर सड़क के दोनो ओर जलनिकासी का प्रबंध हो तो जलभराव नहीं होगा।
कस्बा निवाड़ीकला के मुख्य बाजार की भी सड़क पर जलभराव की स्थिति बन जाती है। करीब एक किमी की दूरी में आरसीसी सड़क को बने दस साल से अधिक समय बीत गया है। लेकिन बनने के बाद आज तक मरम्मत न होने से सड़क खस्ताहाल हो गई है। बारिश में जलभराव के चलते मुख्य सड़क से निकलना जान जोखिम में डालने जैसा है। सबसे ज्यादा खराब स्थिति पेवली चौराहे की है। यहां जलभराव के चलते अक्सर वाहन निकलते वक्त गंदे पानी की बौछार आसपास के दुकानों पर आ जाती है।
अहेरीपुर के दुकानदार अनिल तिवारी कहते हैं कि खस्ताहाल सड़क के चलते बाजार में दुकानदारी चौपट है। यहां आने से पूर्व ग्राहकों को कई बार सोचना पड़ता है। बारिश में तो हाल और भी बुरा है। कहने को दुकानें खुलती हैं, लेकिन कभी-कभी बोहनी तक नहीं होती है। कई बार इस सड़क की नापजोख हो गई। इससे लगा कि अब शायद सड़क के दिन बहुरेंगे, लेकिन हुआ कुछ नहीं। अब सड़क कब बनेगी इसका पता नहीं।
निवाड़ीखुर्द निवासी पवन दीक्षित ने बताया कि प्रत्येक बरसात में अहेरीपुर की मुख्य सड़क के गड्ढों में पानी भर जाता है। बीते वर्ष सड़क पर गिट्टी डाल कर पैचिंग वर्क कर दिया था। जिससे जलभराव से राहत तो मिली, लेकिन पैचिंग का काम भी ठीक से न होने के कारण वाहन सवार गिरकर चोटिल होने लगे। अब फिर से सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। यहां तक कि यह अंदाज लगाना मुश्किल होता है कि कौन गड्ढा कितना गहरा है ।
उरैन्ग निवासी बलबीर सिंह ने बताया कि सड़कों की मरम्मत कराने और अहेरीपुर के मार्ग का निर्माण कराने के लिए उन्होंने कर्तव्य एवं जन अधिकार संस्था के बैनर तले आंदोलन भी किया था। तब आश्वासन मिला था कि मार्ग का निर्माण जल्द कराया जाएगा। आंदोलन के तीन वर्ष होने के बाद भी स्थिति जस की तस है। सड़क निर्माण तो दूर, खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत तक नहीं कराई जा सकी है। बारिश में स्थिति बद से बदतर है।
बस्ती महेवा , महेवा बहेड़ा मार्ग , लुधयानी , मुकटपुर सहित कई गांवों के संपर्क मार्ग गड्ढों के कारण जलमग्न हो जाते हैं।