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मनुष्य के कल्याण का सर्वोत्तम ग्रंथ है रामचरित मानस

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इटावा। नुमाइश पंडाल में शनिवार को तीन दिवसीय श्रीरामचरितमानस सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए सभी मानसप्रेमियों ने एक स्वर से रामचरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किये जाने की मांग की। सम्मेलन के मुख्य अतिथि सांसद डा. रामशंकर कठेरिया ने कहा कि रामचरित मानस के माध्यम से देश और समाज की सारी समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। यह मनुष्य के कल्याण का सर्वोत्तम ग्रंथ है।
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मानस सम्मेलन के मुख्य वक्ता वृंदावनधाम से पधारे मानस मर्मज्ञ डॉ. विजयकृष्ण चतुर्वेदी ने कहा कि राम चरित मानस को राष्ट्रीय ग्रंथ इसलिए घोषित किया जाना चाहिए क्योंकि इसमें लोकमंगल की भावना निहित है।यह सबके लिये कल्याणकारी और हितकारी है। जीवन की आदर्श आचार संहिता के सारे विंदु रामचरित मानस से लिए जा सकते हैं।
मानस के प्रसंगों का गूढ़ विवेचन करते हुए डॉ. चतुर्वेदी ने भक्ति के स्वरूप व पात्रता पर कहा कि विश्वास से भी महत्वपूर्ण है धैर्य। विश्वास गुरु वचनों पर हो। विश्वास से भक्ति दृढ होती है लेकिन धैर्य से पुष्ट होती है। धैर्य के बिना भक्ति टिकेगी ही नहीं। भक्ति का स्वरूप है सेवा और सेवा का धर्म सबसे कठोर होता है। सुतीक्ष्ण जी को विश्वास था कि रामजी मिलेंगे लेकिन नहीं मिले जबकि शबरी ने धैर्यपूर्वक इंतजार किया और एक दिन स्वयं राम चलकर उसके यहां पहुंचे। सम्मेलन में सुनीता दीक्षित श्यामा द्वारा रचित पुस्तक जानिए- भारत के व्रत और त्योहार का विमोचन भी किया गया। सम्मेलन को सफल बनाने में ओम प्रकाश मिश्र,ब्रजेश बंसल, ओम नारायण शुक्ला, आशुतोष त्रिवेदी, सुधीर मिश्र, देवेन्द्र तिवारी , रमाकांत त्रिपाठी का विशेष सहयोग रहा। अध्यक्षता बाबू गिरिराज नारायण अग्रवाल ने तथा संचालन प्रो. शैलेन्द्र शर्मा ने किया।
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इससे पूर्व मानस सम्मेलन का मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया गया। सेविन हिल्स स्कूल के बच्चों ने सरस्वती वंदना तथा बालक कार्तिक दुबे ने स्वागत गीत गाया। सम्मेलन के संरक्षक डा. विश्वपति त्रिवेदी ने संयोजक संजीव अग्रवाल के साथ मुख्य वक्ता मानस मर्मज्ञ डा. विजय कृष्ण चतुर्वेदी ,सांसद राम शंकर कठेरिया, स्वामी शिवानंद महाराज ,धीरेंद्र प्रताप अति. कमिश्नर आयकर ( आगरा ) अनिल कुमार शर्मा, डॉ अशोक दीक्षित, फुरकान अहमद, समेत सभी अतिथियों का स्वागत किया।
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