जल संरक्षण के लिए अब विद्यालयों का भी उपयोग किया जाएगा। शासन स्तर से विद्यालयों में रुफआप रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली लागू की जा रही है। इसके लिए विद्यालयों से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
जल संरक्षण को लेकर सरकार अब गंभीर है। स्कूलों में भी रेनवाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली प्रक्रिया शुरू भी हो गई है।
विद्यालयों 14 अगस्त तक इस संबंध में एस्टीमेट मांगे गए हैं। एस्टीमेट डीआईओएस कार्यालय से निदेशालय को भेजे जाएंगे।
पिछले काफी समय से जलसंरक्षण को लेकर कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। सरकार इसे लेकर गंभीर है। अब विद्यालयों में भी बरसात का पानी संरक्षित किया जाएगा। यह पानी बर्बाद न हो और इसका कहीं प्रयोग किया जा सके।
इसके लिए निर्देश जारी कर दिए गए है। इस मामले को लेकर डीआईओएस राजू राणा ने प्रधानाचार्यों से कहा है कि माध्यमिक विद्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली की व्यवस्था की जानी है।
इसके लिए कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति तथा जरूरत के अनुसार आगणन तैयार करके भेज दें। डीआईओएस राजू राणा ने यह भी कहा कि यह 14 अगस्त तक हर हाल में कार्यालय में भेज दें ताकि उसे निदेशालय भेजा जा सके।
यह भी कहा है कि इसमें देरी होने की दशा में प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे। सरकारी भवनों की छतों पर रेनवाटर हार्वेस्टिंग के इंतजाम किए जाने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं।
अब विद्यालयों को भी इसमें जोड़ लिया गया है। माध्यमिक विद्यालयों के भवन काफी बड़े होने के चलते इनमें वाटर हार्वेस्टिंग अच्छे तरीके से हो सकेगी।