जिले में आठ साल पहले घोषित पेयजल की 30 परियोजनाएं बजट की कमी के कारण आधी-अधूरी पड़ी हैं। वर्ष 2007-08 की इन योजनाओं के लिए शासन से जो पैसा मिला था, उसमें से मुख्यमंत्री घोषणा के अनुसार पांच सौ हैंडपंप लगा दिए गए।
इसके बाद शासन से बकाया रकम नहीं मिली, लिहाजा सभी परियोजनाएं अधूरी पड़ी हैं। लोग पीने के पानी के संकट से जूझ रहे हैं। आठ साल पहले घोषित इन परियोजनाओं के लिए ट्यूबवेल स्थापित किए गए थे, लेकिन पानी की पाइप लाइन और ओवर हैड टैंक समेत बाउंड्री आदि पूरी न होने से लोगों को इन परियोजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
अभी तक सभी पेयजल परियोजनाओं के लिए बिछाई जाने वाली पाइप लाइन का पचास फीसदी ही काम पूरा हुआ है।
करीब आधा दर्जन परियोजनाओं में पानी की टंकी नहीं बनी है। परियोजना में कुंजपुरा, परसौआ, अजनौरा, भीखनपुर, सरायभूपत, कुरसेना, धौलपुर, ककरई, कुकावली, भोली, भुजपुरा, बंधा, बियारीभटपुरा, लरखौर, खरदूली, रामेत, चकूपुर, अमरशीपुर भाऊपुर, उझियानी, भदेई, परासना, हरदोई, जाफरपुर, बीना, सुल्तानपुर, खेड़ा हेलू, मसनाई, मूंज, अगूपुर, मोहनपुर राहिन शामिल हैं।