सैफई। आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय में शोधकर्ताओं को गुणवत्तापूर्ण शोध प्रस्ताव तैयार करने का प्रशिक्षण दिया गया। इसमें वैज्ञानिक लेखन और अनुसंधान परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्राप्त करने की जानकारी दी गई। यह तीन दिवसीय कार्यशाला स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर), भारत सरकार तथा आईसीएमआर के उत्कृष्टता केंद्र, आईआईटी-बीएचयू के सहयोग से आयोजित हुई।
कार्यशाला में विभिन्न चिकित्सा एवं शैक्षणिक संस्थानों के शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों ने भाग लिया। कुलपति प्रो. अजय सिंह के मार्गदर्शन में मल्टीडिसिप्लिनरी रिसर्च यूनिट (एमआरयू) ने इसे आयोजित किया। इसमें शोध पद्धति, नमूना आकार गणना, जैवसांख्यिकी और शोध नैतिकता पर व्यावहारिक प्रशिक्षण मिला। आईआईटी-बीएचयू, एसजीपीजीआईएमएस लखनऊ और आयुर्विज्ञान विवि सैफई के विशेषज्ञों ने शोध की रूपरेखा व अध्ययन पद्धति पर प्रकाश डाला।
कुलपति प्रो. अजय सिंह ने कहा कि अनुसंधान वैज्ञानिक प्रगति और साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य सेवाओं की आधारशिला है। गुणवत्तापूर्ण शोध से चिकित्सा पद्धतियों को प्रभावी बनाने और मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिलती है। कार्यशाला के संयोजक प्रो. सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय में अनुसंधान संस्कृति को बढ़ावा देना है। उन्होंने चिकित्सा अनुसंधान को मरीजों के उपचार और जनस्वास्थ्य में सुधार से जोड़ने पर जोर दिया।