इटावा। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की रक्षा, उसे लागू कराने की कानूनी गारंटी, धान, मक्का आदि की सरकारी खरीद शुरू कराने, काले कृषि कानूनों की वापसी, पर्याप्त डीएपी तथा पराली संबंधी फरमान वापस लेने जैसी मांगों को उठाते हुए नई मंडी में किसानों ने प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।
उप्र किसान सभा के महामंत्री मुकुट सिंह ने अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के देशव्यापी एमएसपी दिवस पर कहा कि कृषि संबंधी काला कानून अपना रंग दिखाने लगा है। एमएसपी दिलाने का संसद में किए गए वादे से प्रधानमंत्री एक बार फिर मुकर गए हैं। स्वामीनाथन के अनुरूप लागत का डेढ़ गुना दाम के वादे को पहले ही तोड़ चुके हैं। यह देश और किसानों के साथ घोखा है। धान का घोषित समर्थन मूल्य 1868-1888 रुपये क्विंटल के बजाए 1000-1100 रुपये क्विंटल तथा मक्का 1850 के बजाए 900-1000 रुपये क्विंटल मान मुन्नवल के साथ खरीदा जा रहा है। सरकार खामोश और तमाशबीन है। पराली जलाने के नाम पर मुस्तैदी दिखाकर किसानों को दंडित कर रही है। मुकुट सिंह ने कहा तीन काले कृषि कानून खेती किसानी का सर्वनाश कर देंगे। इनसें मंडियों का खात्मा, ठेका खेती-जमाखोरी, काली बाजारी को बढ़ावा मिलेगा।
किसान सभा के जिला मंत्री संतोष शाक्य ने 1509 जैसे उच्च कोटि चावल वाले धान के दाम 3500-4000 रुपये क्विंटल करनेे, सरकारी क्रय केंद्र शुरू कराने, बिजली कटौती, मूल्य वृद्धि, अन्ना पशुओं से फसल उजाड़ने के मामले को उठाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी। माकपा जिलामंत्री नाथूराम यादव ने समर्थन करते हुए डीएपी खाद में कटौती, स्थानीय समस्याओं को उठाया। इस दौरान सीटू नेता अमर सिंह शाक्य, माकपा शहर मंत्री प्रेमशंकर यादव, किसान सभा के उपाध्यक्ष रामवरन, सयुक्त मंत्री संतोष राजपूत, लज्जाराम पाल, कैलाश बाबू यादव, डॉ. अटल बिहारी, इंद्रपाल, आदि ने संबोधित किया। नई मंडी आकर सिटी मजिस्ट्रेट उमेश कुमार मिश्र ने ज्ञापन लिया। अध्यक्षता डा. विश्राम सिंह व संचालन संतोष शाक्य ने किया।