इटावा। सामाजिक क्रांतिकारी पूर्व विधायक प्रो. सहदेव सिंह यादव के 9 वें परिनिर्वाण दिवस पर सरायभूपत स्थित पंचशील इंटर कालेज पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
कौमी तहफ्फुज कमेटी के संयोजक खादिम अब्बास ने कहा कि प्रो. सहदेव सिंह अपने आप में एक चलती फिरती पाठशाला थे। उन्होंने पिछड़े वर्ग व दलित समाज में शिक्षा की मशाल जलाकर उपेक्षित व तिरस्कृत समाज को शिक्षित बनाने में अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया। वह तथागत गौतम बुद्ध के उपासक के साथ विशुद्ध रूप से कबीर पंथी थे। वह समाजवादी चिंतक व विचारक थे। प्रोफेसर साहब की महानता को इससे ही समझा जा सकता है कि बसपा संस्थापक एवं 15 बनाम 85 के जनक कांशीराम प्रो. सहदेव सिंह यादव से उनके निवास स्थान भरथना व इटावा में उनसे विचार विमर्श के लिए अक्सर आते रहते थे। दहेज निवारण परिषद के अध्यक्ष बाबा हर नारायण यादव ने कहा कि प्रो. सहदेव सिंह दो बार भरथना से विधायक बने। उन्होंने यह चुनाव साइकिल चला कर जीते। वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश प्रताप सिंह धनगर ने कहा कि वे सांप्रदायिकतावादी शक्तियों के कट्टर विरोधी थे। डा. धर्मेद्र कुमार, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष उदयभान सिंह यादव ने कहा हम युवाओं को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। उनके पुत्र आदित्य यादव बिल्लू की सराहना की।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में प्रमोद यादव, वीरेंद्र यादव, राकेश कुमार, हजारा सिंह, सूरजभान एड, रमेश जाटव, मु. हाशिम, अनार सिंह एड, सुवेंद्र सिंह, ऋषि यादव ने भी अपने विचार रखे। संचालन सुग्रीव यादव ने किया। प्रधानाचार्य प्रीति यादव व प्रबंधक आदित्य यादव ने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।