फोटो 25: इमरजेंसी वार्ड में घायल का टार्च की रोशनी में इलाज करते कर्मी। स्रोत सोशल मीडिया
इटावा। अफसरों के आदेश के बाद भी जिला अस्पताल की व्यवस्थाएं पटरी पर नहीं आ रही है। जिला अस्पताल में अक्सर बिजली घंटों गायब रहती हैं। बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में करीब 40 मिनट बिजली गुल रही। इसकी वजह से इमरजेंसी समेत विभिन्न वार्ड में अंधेरा छा गया। ऐसे में डॉक्टरों व कर्मचारियों को टॉर्च की रोशनी में इलाज करना पड़ा। वहीं, वार्ड में भर्ती मरीजों को उमस भरी गर्मी में परेशान नहीं उठाना पड़ा। इसके बावजूद जिला अस्पताल का जनरेटर नहीं चलाया गया।
बृहस्पतिवार को संयुक्त जिला अस्पताल की बिजली शाम साढ़े सात बजे फॉल्ट की वजह से गुल हो गई। इससे इमरजेंसी वार्ड समेत विभिन्न वार्ड में अंधेरा छा गया। इस दौरान जिला अस्पताल का जनरेटर नहीं चलाया गया। सबसे अधिक दिक्कत इमरजेंसी वार्ड में हुई। इस दौरान आने वाले घायलों व मरीजों का इलाज करने में परेशानी हुई। इस दौरान डॉक्टर व कर्मचारियों ने टॉर्च की रोशनी में इलाज किया। इससे डॉक्टरों व कर्मचारियों के साथ मरीजों को परेशानी उठानी पड़ी।
जिला अस्पताल में बिजली जाने पर सर्जिकल वार्ड, शिशु वार्ड, पुरुष वार्ड, एनआरसी, वृद्ध वार्ड व आपदा वार्ड में भर्ती मरीजों को उमस भरी गर्मी में परेशान होना पड़ा। सबसे अधिक दिक्कत मरीजों व तीमारदारों हुई। डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ में इन्वर्टर से पंखे चलते रहते हैं लेकिन मरीजों के वार्ड में बैकअप की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में लाइट जाने पर मरीज को मजबूरी में वार्ड में रुकना पड़ता है जबकि तीमारदार वेटिंग हॉल व गैलरी में बिजली न आने तक मोबाइल चलाकर समय काटते हैं। करीब 40 मिनट बाद बिजली आपूर्ति बहाल होने पर सभी ने राहत की सांस ली।
वर्जन-
जिला अस्पताल में बिजली जाने पर जनरेटर चलाने के सख्त आदेश दिए गए हैं। गुरुवार रात बिजली जाने पर अगर जनरेटर नहीं चलाया गया है तो संबंधित कर्मचारी से इस मामले में पूछताछ की जाएगी। संतोषजनक उत्तर न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. पारितोष शुक्ला, सीएमएस पुरुष जिला अस्पताल