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राजनीति में भी चला था कुश्ती का दांव- मुलायम

Tue, 05 Jan 2016 12:01 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, इटावा
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कभी खुद पहलवान रहे सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को बातों बातों में खुलासा किया उन्होंने एक बार राजनीति में कुश्ती का चरखा दांव चलकर एक महारथी को चित किया था। हालांकि उन्होंने  किसे चित किया था, उस व्यक्ति या नेता का नाम नहीं खोला। इतना जरूर कहा कि उनको घमंड बहुत था, जिसे तोड़ दिया था।
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सैफई महोत्सव में सोमवार को सैफई के चंदगीराम स्टेडियम में आयोजित दंगल को देखने आए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव का पूरा भाषण गैर राजनैतिक रहा। उन्होंने कहा कि एक पहलवान को बहुत संयम से रहना पड़ता है। कड़ी तपस्या करनी पड़ती है, तब कहीं कामयाब पहलवान बन पाता है।

उन्होंने कहा कि लोग कहें कुछ भी, लेकिन सबसे अच्छा खेल कुश्ती ही है। हरियाणा के सुशील कुमार जैसे कई नामीगिरामी पहलवान हैं, जिन्होंने कुश्ती के क्षेत्र में विश्व में धाक जमाई है। उन्होंने कहा कि सैफई महोत्सव के अन्य कार्यक्रमों के तो कार्ड बांटे जाते हैं, लेकिन दंगल का कोई निमंत्रण नहीं दिया जाता।
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फिर भी इसमें सबसे अधिक भीड़ जुटती है। यह कुश्ती के प्रति लोगों की दीवानगी को ही दर्शाता है। उन्होंने सैफई दंगल के संयोजक और प्रधान दर्शन सिंह यादव के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा की प्रधान जी से ही उन्होंने चरखा दांव सीखा था। कुश्ती में चरखादांव ऐसा दांव है, जो इस दांव पर आ गया तो बचा कोई नहीं है।

एनसीपी नेता शरद पवार भी देश के बड़े पहलवानों में से एक हैं। 20-25 पहलवानों को तो वह खुद जानते हैं, जो लोकसभा में रहे और उनकी गिनती देश के बड़े नेताओं में होती है। सपा मुखिया ने मजाकिया लहजे में कहा कि वह भी लड़ते (पहलवानी) रहे, लेकिन उनकी गिनती यहीं तक सीमित रही।

संबोधन के दौरान उन्होंने मास्टर चंदगीराम के नाती भारत केसरी देवव्रत को मंच बुलवाकर उनकी पीठ भी थपथपाई और नौजवानों से कहा कि वह उनसे प्रेरणा लें। लोगों से आह्वान किया कि वह इसी तरह दंगल में आते रहें। 
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