शादी समारोह में चर्चा करते लोग
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बकेवर । विधानसभा चुनाव का रंग शादी समारोह में भी दिखने लगा है। पंडालों में दुल्हन-दूल्हा से ध्यान हटाकर लोग हाथों में भोजन की प्लेट लिए या सर्द रात में गर्म कॉफी की चुस्की लेते हुए चुनावी चर्चाओं में मशगूल दिख रहे हैं। चुनावी चर्चाओं में तर्क पर तर्क दिए जाते हैं।
एक वैवाहिक समारोह में कुछ लोग चुनावी चर्चा कर रहे थे। इतने में राजनीति में रुचि रखने वाले कुछ और लोग भी हाथ में खाने की प्लेट या गरम काफी की प्याली लिए आगे बढ़ आए। फिर क्या था तर्क पर तर्क और आंकड़ों पर आंकड़े, जातीय समीकरण, उम्मीदवारों का व्यक्तित्व, यहां तक कि राजनीतिक पार्टियों के कामकाज, सरकारों के कार्यकाल, प्रत्याशी के स्वभाव, मतलब परस्ती जैसे न जाने कितनी चर्चाएं शुरू हो गईं। तर्क ऐसे की राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ता भी फीके पड़ जाएं। चर्चा भी बेबाक, निष्पक्ष, बिना किसी लाग लपेट के। इतने में अलग-अलग दलों के समर्थक भी आ गए। फिर क्या था चर्चा में मशगूल लोगों ने कहा कि अब जनता बेवकूफ नहीं रही, जिसे भरमा पाओगे। उन्हें यूं लपेटा कि समर्थकों को मौके से खिसकना ही पड़ा। लोगों का कहना है कि इस बार का चुनाव बिना किसी लहर का है। वादों व घोषणाओं में भरमा कर जनता का भरोसा जीतना किसी भी राजनीतिक दल या नेता के लिए आसान नहीं है।