हर वर्ष वन महोत्सव के दौरान लाखों रुपये खर्च करके पौधरोपण कराया जाता है, लेकिन देखरेख के अभाव में अधिकतर पौधे या तो सूख जाते हैं या फिर जानवरों का निवाला जाते हैं।
इस बार भी पौधरोपण का दौर जोर शोर से चल रहा है, लेकिन बीते वर्ष लगाए गए 24 लाख से ज्यादा पौधों में कितने बचे और कितने पौधे पेड़ बन गए इसकी जानकारी किसी के पास उपलब्ध ही नहीं है।
भारत छोड़ो आंदोलन की 77वीं वर्षगांठ पर 9 अगस्त 2019 को जनपद में बड़ी संख्या में पौधे रोपित किए गए थे।
इस दौरान जिले में कुल 2460028 पौधे लगाए गए थे। इसमें से 9 लाख 37 हजार 991 पौधे वन विभाग और 15 लाख 22 हजार 37 पौधे अन्य विभागों ने लगवाए थे। सबसे अधिक 464217 पौधे महेवा ब्लॉक की 91 ग्राम पंचायतों में लगे थे।
बता दें कि पौधरोपण के दौरान जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और क्षेत्रीय लोगों ने खूब पौधे लगवाकर उनकी देखभाल की शपथ भी ली थी। इससे उम्मीद थी कि इतनी बड़ी संख्या में लगाए गए पौधे बड़े होकर हरियाली लाएंगे और वातावरण भी शुद्ध होगा।
लेकिन साल बीतने से पहले ही इन पौधों का कोई अता पता ही नहीं है। क्योंकि इन पौधों की किसी ने सुध ही नहीं ली। इसका नतीजा यह रहा कि ज्यादातर पौधे सूख गए या फिर पशुओं ने बर्बाद कर दिए।
ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों में तो पौधरोपण की जगह चारागाह बन चुकी है। अगर प्रशासन ने गंभीरता से इस ओर ध्यान नहीं दिया तो पिछले वर्ष की तरह इस बार भी अनदेखी के चलते पौधरोपण में खर्च होने वाली रकम बर्बाद हो जाएगी।
युवा जन जागरूक सेवा समिति के संचालक पंकज यादव का कहना है कि शासन ने पौधरोपण के दौरान ट्री गार्ड की व्यवस्था की होती तो काफी पौधों को बचाया जा सकता था। लेकिन कुछ जिम्मेदारी आम नागरिकों की भी है कि वह पौधों को बचाएं, जिससे आने वाली पीढ़ी को समस्याओं से न जूझना पड़े।
लखना रेंज के क्षेत्रीय वन अधिकारी विवेकानंद दुबे ने कहा कि जो विभाग जिन पौधो का रोपण कराता है उसी विभाग का दायित्व होता है कि उन पौधों के देखभाल कराना सुनिश्चत करे। उनके विभाग द्वारा लगाए गए पौधो की स्थिति बेहतर है ।