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Etawah News: स्पेशल ट्रेनों में यात्रियों को देना पड़ रहा तीन गुना किराया

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इटावा। होली पर ट्रेनों का सफर इस बार काफी महंगा साबित होने वाला है। उत्तर-मध्य रेलवे प्रयागराज मंडल ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए स्पेशल ट्रेनें तो चलाई हैं लेकिन इनका किराया यात्रियों के पसीने छुड़ा रहा है। हालत यह है कि इन ट्रेनों में सफर करने के लिए यात्रियों को सामान्य से लगभग तीन गुना तक अधिक किराया चुकाना पड़ रहा है।
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बता दें कि होली के कारण ट्रेनों में यात्रियों की भीड़ बढ़ गई है। दैनिक ट्रेनों में लंबी प्रतीक्षा चल रही है। हावड़ा-दिल्ली मार्ग पर इटावा जंक्शन से 84 दैनिक ट्रेनें गुजरती हैं, जिनमें नौ दिल्ली होते हुए जयपुर जाती हैं। होली से हफ्तों पहले ही दैनिक ट्रेनें पूरी तरह भर चुकी हैं जिससे सुनिश्चित टिकट मिलना नामुमकिन है।
रेलवे ने यात्रियों के लिए कई विशेष ट्रेनें चलाई हैं जिनमें इटावा जंक्शन पर छह का ठहराव हो रहा है। इन विशेष ट्रेनों में तत्काल की दरें लागू होने से किराया बढ़ गया है। दिल्ली जाने के लिए दैनिक ट्रेन का स्लीपर टिकट 205 रुपये का है जबकि विशेष ट्रेन में 400 रुपये लगते हैं। लखनऊ के लिए सामान्य ट्रेन का आरक्षित टिकट 120 रुपये का है वहीं विशेष ट्रेन में 320 रुपये से अधिक किराया है।
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नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस, वैशाली एक्सप्रेस, आम्रपाली एक्सप्रेस व नेताजी एक्सप्रेस में नो रूम दिखा रहा है। ऐसे में इन ट्रेनों में सभी सीटें 16 मार्च तक फुल हैं।





नोएडा में काम करता हूं। होली पर घर आने के लिए एक महीने पहले से कोशिश कर रहा था लेकिन नियमित ट्रेनों में वेटिंग 200 के पार है। अब स्पेशल ट्रेन का विकल्प बचा है लेकिन उसका किराया देखकर तो होश उड़ गए। जो सफर 205 रुपये में होता था, उसके लिए अब 400 रुपये पड़ेंगे।


बेटे को परिवार के साथ बेंगलुरु से आना है। स्पेशल ट्रेनों में डायनेमिक फेयर और स्पेशल चार्ज के नाम पर तीन गुना वसूली हो रही है। आम आदमी त्योहार की खुशियां मनाए या अपनी पूरी जमापूंजी टिकटों पर खर्च करे। प्रशासन को चाहिए कि त्योहारों पर किराये में राहत दे न कि उसे और बढ़ाए।


-स्पेशल ट्रेनों में बुकिंग शुरू होते ही तत्काल कोटा जैसा चार्ज लागू हो जाता है।

-मगध, वैशाली और गोमती एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों में तिल रखने की जगह नहीं है।

-मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए एक साथ 3-4 सदस्यों का टिकट कराना बजट बिगाड़ रहा है।

सामान्य ट्रेनों की अपेक्षा स्पेशल ट्रेनों का किराया अधिक होता है लेकिन इसमें यात्रियों को जल्द टिकट मिल जाती है। साथ ही भीड़ भी कम होती है। इससे वह त्योहार पर आसानी से आवागमन कर सकते हैं।
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-अमित कुमार सिंह, पीआरओ उत्तर-मध्य रेलवे प्रयागराज।
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