चकरनगर। चंबल नदी में नहा रही बालिका को मगरमच्छ के खींच लेने की घटना से इलाके में दहशत है। ग्रामीणों ने नदी जाना छोड़ दिया है। वन्य जीव विशेषज्ञों का कहना है कि चंबल में मगरमच्छ, घड़ियाल के साथ ही कई जीव हैं। बालिका को मगरमच्छ ने खींचा या किसी अन्य जीव ने, अभी यह तय नहीं है।
मालूम हो कि आगरा जनपद के वाह से लेकर इटावा पंचनद तक चंबल नदी को घड़ियाल, मगरमच्छ एवं डाल्फिन मछली के संरक्षण की दृष्टि से सेंचुरी घोषित किया गया है। घड़ियाल एवं मगरमच्छ अपने अंडे बालू में ही देते हैं। उनके प्रजनन को किसी तरह से नुकसान न पहुंचे इसलिए पूरे क्षेत्र में खनन, मछलियों का शिकार प्रतिबंधित है। इस इलाके के लोगों से नदी में जाने से भी मना किया गया है। इसके बाद नदी के किनारे बसे लोग नहाने के लिए चंबल नदी में जाते हैं।
सोमवार को ढकपुरा गांव निवासी बालिका को नहाते समय किसी जीव ने खींच लिया। बालिका नीरज की मां ने मगरमच्छ के खींचने की बात बताई। दूसरी तरफ वन्य जीव जंतु प्रतिपालक सुरेशचंद्र राजपूत का कहना है कि चंबल में बड़ी संख्या में घड़ियाल है। ये हमला कम ही करते हैं। मगरमच्छ का सवाल है तो वह हमला कर सकता है। लेकिन घाट पर तमाम लोग मौजूद थे। भीड़ होने पर वह हमला करने की हिम्मत नहीं जुटाता है। ऐसे में बालिका को कौन सा जानवर खींच, यह स्पष्ट तौर पर कहा नहीं जा सकता है। इस समय जलचरों में प्रजनन का समय चल रहा है।
ग्रामीणों में दहशत
चंबल नदी में बालिका के गायब होने के बाद से इलाके में दहशत है। लोगों ने नदी किनारे जाना छोड़ दिया है। ग्रामीण रामसुंदर ने बताया कि बालिका की खोजबीन की गई। लेकिन उसके अस्थि पंजर भी नहीं मिले हैं। गांव में शोक का माहौल है।
सालभर पहले भी किया था हमला
करीब सालभर पहले चंबल नदी में सहसो में दो लोगों पर मगरमच्छ ने हमला किया था। लेकिन भीड़ होने की वजह से लोगों ने शोर मचाया। कई लोग पानी में कूद गए तो मगरमच्छ ने छो़ड़ दिया था। वन्य जीव विशेषज्ञ डा. राजीव चौहान का कहना है कि चंबल नदी के किनारे लोगों को खासतौर पर महिलाओं और बच्चों को जाने से बचना चाहिए। यह क्षेत्र मगरमच्छ एवं घड़ियालों का अभ्यारण्य है। उनका विचरण कभी भी कहीं भी हो सकता है।