इटावा। नई मंडी में पिछले दो दिन से क्रय केंद्र प्रभारियों का कार्य बहिष्कार शनिवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। टिनशेड में खरीदे गए धान के बोरों के ढेर को कोई देखने वाला न होने का फायदा मंडी परिसर में विचरण करने वाले छुट्टा मवेशी उठा रहे हैं।
वह धान के बोरों में मुंह मारते फिर रहे हैं। इस वजह से बोरे फटने से धान गिर कर बर्बाद हो रहे हैं। इधर केंद्र प्रभारियों के कार्य बहिष्कार में शामिल होने की वजह से धान लेकर आए किसानों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
हालत यह है कि किसानों को दो दिन से गलन भरी रात खुले में गुजारनी पड़ रही है। मंडी परिसर में ठंड से बचने के लिए अलाव तक की व्यवस्था नहीं है। किसी किसान का धान क्रय केंद्र के सामने फर्श पर पड़ा है, तो किसी के ट्रैक्टर-ट्राली में धान के बोरे भरे पड़े हैं।
शनिवार की उम्मीद टूटने के बाद अब उन्हें रविवार की रात भी मंडी में गुजारनी पड़ेगी। ग्राम चंदेपुरा से 30 दिसंबर को करीब 40 क्विंटल धान बेचने आए किसान रामरतन ने बताया टोकन मिलने के बाद ही धान बेचने आए थे।
धान उतरवा लिया था, लेकिन उसी दिन कार्य बहिष्कार होने की वजह से धान की तौलाई नहीं हो सकी। तब से लेकर अब तक धान की रखवाली करनी पड़ रही है।
रात के समय पशुओं को भगाना पड़ रहा है। ग्राम गूजरझाल से आए किसान विशंभर सिंह ने बताया कि वह 30 दिसंबर को धान बेचने आए थे। 2100 रुपये ट्रैक्टर का किराया देकर आए हैं।
धान खरीद बंद होने से ट्राली मेें बोरे भरे हैं। 500 रुपये रोज किराया देना पड़ रहा है। कहा कि धान न बिकने की वजह से रात में रुकने से काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। अब सोमवार तक इंतजार करना पड़ेगा।
शाम तक किसी वाहन को खड़ा नहीं कराते हैं। शाम को वेरिफिकेशन करा लेते हैं। कुछ बिचौलिए समाजसेवी के नाम पर आरोप लगा रहे हैं, दबाव भी बनाने को ज्ञापन रहे हैं। धान रिजेक्ट होने के बाद भी खड़े हैं। इसके विरुद्ध किसान जांच कमेटी के समक्ष अपील कर सकते हैं।
- संतोष कुमार पटेल, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी