इटावा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक करीब 48 हजार लोग निरक्षर रह गए हैं। निरक्षरों को पढ़ना लिखना सिखाने के लिए चलाए जा रहे साक्षर भारत मिशन के बंद हो जाने से वे फिलहाल अंगूठाटेक ही रह गए हैं। खास बात यह है कि इस मिशन से जिले में छह सौ से अधिक प्रेरकों को रोजगार मिला हुआ था, उनका रोजगार भी चला गया।
सभी को साक्षर करने के लिए केंद्र सरकार व राज्य सरकार की ओर से योजनाएं चलाई जाती हैं। इसी के तहत साक्षर भारत मिशन शुरू किया गया था। जो जिले की सभी ग्राम पंचायतों में संचालित किया जा रहा था। इसके लिए प्रत्येक गांव में दो दो प्रेरक तैनात किए गए थे। लगभग 640 प्रेरक गांवों में निरक्षरों को एकत्रित करके उन्हें साक्षर करने की प्रक्रिया में जुटे थे। इस अभियान में जिस स्थान पर निरक्षरों को पढ़ाया जाता है। उसे लोक शिक्षा केंद्र का नाम दिया गया था। इन लोक शिक्षा केंद्रों में प्रेरक पहुंचते थे और इन निरक्षरों को पढ़ना लिखना सिखाते थे। पिछले कई वर्षों से यह अभियान चल रहा था। इस योजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से रकम मुहैया कराई जाती थी।
केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2018 के बाद से इस योजना के लिए फूटी कौड़ी भी नहीं दी है। इसका नतीजा यह निकला है कि जितने व्यक्ति साक्षर होने से रह गए हैं, वे अभी तक अंगूठाटेक बने हुए हैं। इस अभियान को जब शुरू किया गया था, तब एक सर्वे कराया गया था। इस सर्वे में निरक्षरों की संख्या लगभग एक लाख 25 हजार पाई गई थी। इन सभी को साक्षर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
इस योजना में 70 प्रतिशत निरक्षर ही साक्षर किए जा सके। इसके बाद अचानक यह योजना बंद कर दी गई। इसके चलते लगभग 48 हजार निरक्षर अभी भी जिले में ऐसे हैं, जिन्हें साक्षर किया जाना है। यह काम बीच में ही रोक दिया गया है। इस कार्य के लिए चार जिला समन्वयक भी बनाए गए थे। मिशन का काम आगे न बढ़ने पर यह जिला समन्वयक भी घर में बैठे हैं।
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पढ़ाई लिखाई के बाद होती थी परीक्षा
साक्षर भारत मिशन के अंतर्गत लोक शिक्षा केंद्रों में निरक्षरों को साक्षर करने के लिए जो पढ़ाई कराई जाती थी, उसमें निरक्षर कितना सीख रहे हैं इसके लिए परीक्षाएं भी कराई जाती थीं। सभी उम्र के महिला, पुरुष इन लोक शिक्षा केंद्रों में मिल जुलकर पढ़ते थे और परीक्षा देते रहे हैं। परीक्षा में पास होने के बाद यह आंकलन हो जाता था कि किस कक्षा तक की पढ़ाई इन निरक्षरों ने सीख ली है। उसके बाद इन्हें मुख्य धारा में सम्मलित करते हुए विद्यालय में उसी कक्षा में प्रवेश भी दिलाया जाता था।
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लोक शिक्षा केंद्रों को मॉडल बनाने की थी योजना
साक्षर भारत मिशन के शुरुआती दौर में लोक शिक्षा केंद्रों को काफी महत्व दिया गया था। गांव-गांव में लोक शिक्षा केंद्र खोले गए थे। इन शिक्षा केंद्रों को मॉडल केंद्र बनाए जाने की भी योजना थी। इसके तहत यहां कंप्यूटर भी लगाए जाने थे। इसके साथ ही अन्य आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने की भी योजना थी, लेकिन मॉडल बनाए जाने से पहले ही साक्षर भारत मिशन ने दम तोड़ दिया।
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बजट मिलने पर होगा काम
जिला समन्वयक अरुण यादव ने बताया कि यह योजना केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित हो रही है। यहां से बजट की डिमांड आदि भेजी गई है। सरकार ने धनराशि आवंटित होते ही योजना का गाइड लाइन के मुताबिक संचालित किया जाएगा।