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सायरन की आवाज सुनते ही बंकरों में छिपकर जान बचाते हैं

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शताब्दी ट्रेन से उतरने के बाद गले तेजस्विता को गले लगाती मां अनीता यादव - फोटो : ETAWAH
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इटावा। यूक्रेन से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही तेजस्विता शुक्रवार शाम सात बजे शताब्दी एक्सप्रेस से उतरी तो उसकी मां की आंखों में खुुुुशी के आंसू छलक पड़े। मां और पिता ने छात्रा को गले लगा दिया। छात्रा ने कहा कि मैं बहुत लकी हूं जो आज अपने घर वापस आ गई। दूतावास के जरिए सही जानकारी न दिए जाने के कारण वहां सैकड़ों छात्र फंसे हैं। वह सायरन की आवाज सुनते ही बंकरों में छिपकर जान बचाते हैं।
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तेजस्विता के पिता सत्येंद्र पाल कृषि इंजीनियरिंग कालेज में डायरेक्टर के पद पर तैनात हैं। मां अनीता यादव माध्यमिक शिक्षा चयन आयोग की पूर्व अध्यक्ष और सपा की महिला विंग की प्रांतीय महासचिव हैं। वह यूक्रेन के विनिस्तिया में एमबीबीएस थर्ड ईयर की छात्रा है। तेजस्विता ने बताया कि वह राजधानी कीव से 200 किमी दूर थी। हम लोग युद्घ की स्थिति पर बराबर नजर बनाए थे। भारतीय दूतावास के अधिकारी गुमराह करते रहे। 15 फरवरी को उन्होंने दूतावास संपर्क किया तो वहां के अधिकारियों ने कहा कि अपनी मर्जी हो तब जा सकते हैं। इसके बाद रूस ने हमला कर दिया।
बताया कि उसकेसाथ 20-25 छात्रों का ग्रुप था। सब इंडिया के ही हैं। हम सभी जूते पहनकर बैठे रहते थे। जैसे ही काई सायरन बजता था डरकर सभी बंकर में जाकर छिप जाते थे। वहां सभी छात्र डरे सहमे रहते हैं। वतन वापसी के लिए हवाई जहाज का किराया भी बढ़ गया है। उसने 20 हजार की जगह 60 हजार रुपये खर्च करके टिकट कराया है। ऐसे में जो छात्र बैंक आदि से ऋण लेकर पढ़ाई करने गए हैं वे बड़ी मुसीबत में हैं। सरकार को सभी छात्रों की वतन वापसी की व्यवस्था करनी चाहिए।
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