इटावा। ग्राम पंचायतों के आरक्षण की अनंतिम सूची जारी होने के बाद सबसे अधिक आपत्तियां ग्राम प्रधान पदों पर आरक्षण को लेकर दर्ज कराई जा रही हैं। पहले दिन तीन ग्राम पंचायतों से आपत्तियां दर्ज कराई गई। आगामी आठ मार्च तक आपत्तियां ली जाएंगीं। नौ मार्च को जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में भेजी जाएंगी।
जसवंतनगर संवाद प्रतिनिधि के अनुसार ग्राम सिरहौल में प्रधानी का पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। ग्रामीणों का कहना है उनके गांव में अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों की संख्या बहुत ही कम है। अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग के लोगों की संख्या काफी अधिक है। पिछली बार यहां का प्रधान पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित था।
अब इस पद को अनारक्षित किया जाना चाहिए। ग्रामीणों का कहना है कि अन्य पिछड़े वर्ग के लिए किया गया आरक्षण गलत है। आपत्ति दर्ज कराने वालों में विकास कुमार, सोबरन सिंह, अनिल कुमार, आलम चंद्र शामिल हैं।
महेवा संवाद प्रतिनिधि के अनुसार ग्राम सुनवर्षा निवासी कृष्ण कांत ने आरोप लगाया कि उनकी ग्राम पंचायत 1995 से लेकर अभी तक कभी भी अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित नहीं हुई। पिछले चुनाव में भी ग्राम प्रधान पद सामान्य था। इस वर्ष भी सामान्य रखा गया है । ग्रामीणों ने पिछड़ा वर्ग के लिए सीट आरक्षित करने की मांग की है।
ताखा ब्लाक की ग्राम पंचायत भरतपुर खुर्द को सामान्य किए जाने पर ग्रामीण रामसेवक प्रजापति ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि भरतपुर खुर्द में सामान्य वर्ग की आबादी 11 प्रतिशत ही है। जबकि पिछड़े वर्ग और अनुसूचित जाति की आबादी अधिक है। इसलिए यहां आरक्षण की चक्रानुक्रम नीति लागू करके ग्राम प्रधान का पद ओबीसी अथवा एससी वर्ग के लिए आरक्षित किया जाए।